आरएसएस से जुडे़ डॉ. गुरदयाल सिंह लुवास के कुलपति बने। लुवास कुलपति पद के लिए दस प्रमुख दावेदार थे। जिसमें लुवास कैंपस से दो प्रमुख दावेदारों में डॉ. गुरदयाल का नाम शामिल था। बुधवार को लिस्ट में उनका नाम सबसे आगे आ गया।
अमर उजाला से बातचीत में डॉ. गुरदयाल सिंह ने कहा कि लुवास के नए कैंपस को शुरू कराना पहली प्राथमिकता रहेगी। जल्द ही यूनिवर्सिटी कैंपस निर्माण शुरू कराएंगे। खुद का कैंपस होने के बाद सहूलियतें हो जाएंगी। फिशरीज कॉलेज अगले सत्र से शुरू कराने की प्राथमिकता रहेगी। इसके अलावा रिसर्च और एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने के लिए किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रयास करेंगे। जिसमें पशुपालन सहित अन्य को बढ़ावा दिया जाएगा।
डॉ. गुरदयाल एचएयू के स्टूडेंट रहे
बुधवार को लुवास बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक में लुवास के दूसरे कुलपति बन गए। डॉ. गुरदयाल एचएयू के स्टूडेंट रहे हैं। यहां से ही बीएसएसी, एमएससी, पीएचडी करने के बाद टीचिंग का कॅरिअर अपनाया।
केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान डॉ. गुरदयाल सिंह के रहे स्टूडेंट
कुलपति पद के लिए डॉ. एनके राखा के बाद डॉ. गुरदयाल सिंह का नाम सबसे प्रमुख था। केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान डॉ. गुरदयाल सिंह के स्टूडेंट रहे हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री डॉ. राधामोहन सिंह से भी डॉ. गुरदयाल सिंह की नजदीकियां हैं। कुलपति की कुर्सी तक पहुंचने में इन दोनों की खास भूमिका रही।
दूसरी पारी के लिए नहीं दिया मौका
वर्तमान कुलपति डॉ. श्रीकांत शर्मा भी एक्सटेंशन के लिए कुछ महीनों से चक्कर लगा रहे थे। अपनी दूसरी पारी के लिए डॉ. श्रीकांत ने यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह सहित कई मंत्रियों के कार्यक्रम आयोजित कराए। प्रदेश सरकार ने उनकी एक्सटेंशन की फाइल को रिजेक्ट कर दिया। डॉ. श्रीकांत शर्मा पर पिछले दिनों काफी आरोप लगे थे। जिस कारण उन्हें दूसरी एक्सटेंशन नहीं दी गई। डॉ. श्रीकांत शर्मा का कार्यभार 27 मार्च को पूरा होगा। इसके बाद डॉ. गुरदयाल कार्यभार संभालेंगे।
चार नाम पर मंथन
कुलपति चयन के लिए बुधवार को डॉ. एनके राखा, डॉ. जगबीर रावत, डॉ. गुरदयाल सिंह के नाम प्रमुख थे। बोर्ड की बैठक में इन तीनों को लेकर मंथन किया। आखिर में बीओएम ने डॉ. गुरदयाल के नाम पर सहमति जता दी। लुवास से रविंद्र शर्मा, डॉ नीता खन्ना, श्रीकांत शर्मा के नाम भी आए थे। कुलपति पद के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के कुछ नाम भी लिस्ट में थे। जो पहले दौर में ही बाहर हो गए।