प्रदेश के कई जिलों में लंपी स्किन डिजीज के मामले सामने आने के बाद जिले में पशुपालन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। 21 पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में खंडस्तर पर सात टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में तीन पशु चिकित्सक, एक बीएलडीए और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा सात मोबाइल वैन भी गांवों में गोवंश की जांच कर रही हैं। जिले में अब तक लंपी का एक भी केस नहीं मिला है। लक्षण मिलने पर जांच के लिए भेजे गए पांच गोवंश के सैंपल निगेटिव आए हैं। जिले के करीब 1.50 लाख गोवंश में से 1.32 लाख का टीकाकरण हो चुका है।
जिले की सभी 69 गोशालाओं में गोवंश की जांच के लिए टीमें भेजी गई हैं। संचालकों को नियमित निगरानी, बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं के रहने के स्थान पर पानी जमा न होने देने और मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय करने को कहा गया है। त्वचा पर गांठ, बुखार या अन्य असामान्य लक्षण मिलने पर संबंधित पशु को अलग कर जांच की जा रही है। टीकाकरण की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है।
1962 पर सूचना देने की सुविधा
पशुपालकों के लिए 1962 टोल फ्री सेवा शुरू की गई है। पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने या चिकित्सा सहायता की जरूरत होने पर इस नंबर पर सूचना दी जा सकती है। प्राप्त सूचना के आधार पर विभाग आवश्यक कार्रवाई करेगा। बीमारी की स्थिति की रोजाना रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा रही है। फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है और बॉर्डर एरिया सील करने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है।
ये हैं लंपी के प्रमुख लक्षण
लंपी स्किन डिजीज में तेज बुखार, त्वचा पर छोटी-बड़ी गांठें, खाना कम करना, दूध उत्पादन में कमी, आंख और नाक से पानी आना तथा कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर पशु को अन्य पशुओं से अलग कर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
अधिकारी के अनुसार
जिले में गोवंश को लंपी से बचाने के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। जुलाई में ही 98 प्रतिशत गोवंश के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया था। गोशालाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में जांच की जा रही है। पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है केवल सावधानी बरतने की आवश्यकता है। - डॉ. संगीता दलाल, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग हिसार।