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Lok Sabha: हिसार में देवीलाल परिवार आमने-सामने, BJP ने प्रत्याशी उतारा, इनेलो की घोषणा बाकी, कांग्रेस पर नजर

Mon, 25 Mar 2024 08:08 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार/चंडीगढ़ (हरियाणा)

सार

हरियाणा के हिसार लोकसभा से चुनाव दिलचस्प होने वाला है। यहां भाजपा ने पार्टी ज्वाइन करते ही रणजीत चौटाला को मैदान में उतार दिया है। वहीं इनेलो की ओर से सुनैना चौटाला का नाम तय माना जा रहा है। आगे इस सीट पर कांग्रेस भी उम्मीदवार जल्द तय कर सकती है। 
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रणजीत सिंह। सुनैना चौटाला। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिसार में भाजपा का टिकट तय होने पर देवीलाल परिवार आमने सामने हो गया है। सुनैना चौटाला को इनेलो चाजा ससुर के सामने टिकट दे सकती है। भाजपा ने रणजीत सिंह चौटाला को हिसार से मैदान में उतारकर ताऊ देवीलाल के परिवार के सामने ही चुनौती खड़ी कर दी है। क्योंकि पिछली बार खुद डिप्टी सीएम रहे दुष्यंत चौटाला हिसार से सांसद रहे थे।
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इस बार इनेलो की ओर से सुनैना चौटाला का नाम तय बताया जा रहा है। ऐेसे में हिसार सीट पर देवीलाल का परिवार ही आमने-सामने हो सकता है। यहां से भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं।

रणजीत के सहारे जाट वोट बैंक साधने की कोशिश
प्रदेश सरकार में बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के कुछ देर बाद ही हिसार से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया गया। रणजीत भले ही भाजपा में अब आए हों लेकिन लंबे समय से वे मोदी-मनोहर की तारीफ करते रहे हैं। भाजपा संगठन के साथ ही आरएसएस से भी नजदीकी और जातीय समीकरण उनके टिकट का प्रमुख आधार बना।
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हिसार से बृजेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद से ही कयास लगाया जा रहा था कि जाट वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा हिसार से किसी मजबूत जाट नेता को मैदान में उतारेगी। इसका मुख्य कारण हिसार में सबसे अधिक जाट मतदाताओं का होना है। रणजीत को टिकट देकर भाजपा ने जजपा के अलग होने से उठ रहे सवालों पर भी एक तरह से विराम लगा दिया है।

अब भाजपा प्रदेशभर में जाट मतदाताओं के बीच पैठ बढ़ाने के लिए पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल का नाम भी भुना सकेगी। इनके उतरने से पार्टी को हिसार के अलावा सिरसा में भी फायदा मिलेगा।

टिकट मिलने का प्रमुख कारण
  • भाजपा और आरएसएस से नजदीकी।
  • जातीय समीकरण, हिसार में सबसे अधिक जाट मतदाता।
  • पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल का विश्वासपात्र रहना। अब पार्टी देवीलाल के नाम को भी भुना सकेगी।
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विश्वस्त होना
  • किसानों के बीच उनके नाम पर अधिक विरोध नहीं होना
  • पिछली बार दो जाट उम्मीदवार थे। इस बार एक ही बचे थे।

प्रदेश भाजपा सरकार में हैं कैबिनेट मंत्री
उनकी उम्र करीब 78 साल है। 1967 में उन्होंने चंडीगढ़ से स्नातक की थी।
रणजीत सिंह फिलहाल रानियां सीट से निर्दलीय विधायक हैं और प्रदेश भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास जेल और बिजली मंत्रालय है। रणजीत सिंह इससे पूर्व 1987 में विधायक बने थे। इसके बाद वह दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके ,लेकिन जीत नहीं पाए। जब 2019 में उनकी टिकट कटी तो समर्थकों की सलाह पर निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए।

कांग्रेस में रहकर कभी जीत नहीं पाए रणजीत सिंह
  • रणजीत सिंह 1987 में चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल की सरकार में कृषि मंत्री बने। तब रोड़ी से विधायक बने थे।
  • 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिरने पर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें हिसार सीट से टिकट दी लेकिन वे हार गए।
  • 2005 , 2009 और 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लड़े लेकिन हार मिली।
  • 2019 में टिकट कटने के बाद कांग्रेस से बागी होकर आजाद चुनाव मैदान में उतरे और जीत गए।
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