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ब्रिटेन का परब्राइट और लुवास मिलकर करेंगे वायरस पर रिसर्च

Fri, 04 Sep 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
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दुनिया में यूनाइटेड किंगडम के पशु रोग की रोकथाम और बचाव के लिए ख्याति प्राप्त परब्राइट संस्थान के साथ मिलकर अब लुवास के साइंटिस्ट जीवाणुओं यानी वायरसों पर शोध कार्य शुरू करेंगे।
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देश में यह पहला ऐसा मौका होगा, जब यूके के परब्राइट संस्थान ने इंडिया के किसी पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय के साथ शोध करने में सहमति जताई हो।

लुवास के कुलपति डॉ. श्रीकांत शर्मा का कहना है कि परब्राइट ने यहां की रिसर्च तकनीक व लैबों का निरीक्षण करने के बाद ही यह निर्णय लिया है। यह हमारे विश्वविद्यालय व देश के लिए गौरव की बात है। पशुओं में पाए जाने वाले दस तरह के जीवाणुओं या वायरस पर शोध कार्य हमारी लैबों में शुरू हो पाएगा।
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परब्राइट की 1500 करोड़ की लैब में होती है वायरसों की जांच
लुवास के कुलपति डॉ. श्रीकांत ने बताया कि यूके के परब्राइट संस्थान में 1500 करोड़ रुपये की लगात से लैब बनाई गई हैं। उनकी खासियत है कि वहां पर अत्याधुनिक मशीनें हैं और वायरस किसी भी कीमत पर बाहर नहीं जा सकता है। इसी के चलते हमारी कोशिश  रहेगी कि नए भवन निर्माण के दौरान परब्राइड के जैसी कुछ लैब बना सके।

ब्लूटंग जीवाणु पर पहले चल रहा है शोध
विवि के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि भेड़ों में पाए जाने वाले ब्लूटंग नामक जीवाणु या वायरस पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, जिसके बेहतर परिणाम हमें जल्द ही मिलने की उम्मीद है। ब्लूटंग वायरस वह है कि जिसमें भेड़ों की जीभ नीली पड़ जाती है और उसी मौत हो जाती है।

साउथ इंडिया में यह सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसके अलावा पीपीआर वायरस पर भी हम शोध कर रहे हैं। परब्राइट से एमओयू साइन हो जाने के बाद अब हम पशुओं में पाए जाने वाले दस तरह के वायरसों पर शोध कर सकेंगे। एक महीने के अंदर परब्राइट के वैज्ञानिकों की एक टीम लुवास आने की उम्मीद है, जिससे हमारे शोध कार्यों को नई दिशा मिलेगी।

13 सितंबर को होगा एमओयू साइन
लेह स्थित डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के साथ 13 सितंबर को लुवास एमओयू साइन करने जा रहा है। लुवास के पास पिछले दिनों डीआरडीओ की ओर से एमओयू के लिए पत्र मिला था।

डीआरडीओ का काम लेह क्षेत्र में पशुओं की नई प्रजातियों को पैदा करने, उनके विकास और दूध की क्षमता बढ़ाने को लेकर रिसर्च किए जाएगह। डायरेक्टर रिसर्च डॉ. रविंद्र शर्मा के अनुसार डीआरडीओ से एमओयू साइन करने के बाद लुवास की शोध क्षमता में और विकास होगा। वह अपने स्तर को और ऊपर उठा पाएगा।
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