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अदालत में गिड़गिड़ाए दोषियों के परिजन, कहा- ये बच्चे हैं, इन पर रहम करना

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अदालत पहुंचे पीड़ित पक्ष से परिजन। - फोटो : Hisar
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हिसार। हांसी के शेखपुरा कांड के आठों दोषियों को सुबह करीब 11 बजे अदालत में पेश किया गया। यहां उनके परिजन भी मौजूद थे। उनके परिजनों ने जज के समक्ष रहम की अपील की। उन्होंने कहा कि ये बच्चे हैं। इनके घर में यही लोग कमाने वाले हैं। इन पर थोड़ा रहम करना। परिजनों ने जज से उन्हें फांसी न दिए जाने की भी गुहार लगाई।
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अदालत में दोषियों के अलावा उनके परिजन, पीड़ित पक्ष के लोग और दोनों पक्षों के वकील मौजूद थे। खचाखच भरी अदालत में दोषियों के परिजन बार-बार रहम की अपील कर रहे थे, जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से केवल उनके वकील बोल रहे थे। पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत से दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग की। जज ने दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद फैसला दोपहर बाद सुनाने को कहा। इसके बाद दोषियों को अदालत परिसर स्थित बख्शीखाना ले जाया गया। इसके बाद उन्हें अदालत के निर्देश पर करीब 3 बजे अदालत में पेश किया गया, जहां जज ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसला सुनते ही मुरझा गए चेहरे
एडीजे वीपी सिरोही द्वारा जैसे ही फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई तो दोषियों के साथ-साथ उनके परिजनों के चेहरे भी मुरझा गए। फैसला सुनाते ही पुलिस ने सभी दोषियों को कोर्ट से बाहर निकाल लिया और बख्शीखाना ले गई। दोषियों के परिजन अपने वकील के पास काफी देर तक खड़े होकर चर्चा करते रहे।
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सुरक्षा के लिए तैनात रही बख्तरबंद गाड़ी
फैसले के कारण अदालत परिसर में शुक्रवार को खासी भीड़भाड़ रही। दोनों पक्षों के लोग फैसला सुनने के लिए अदालत परिसर पहुंचे हुए थे। इसके चलते परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की गई थी। एक बख्तरबंद गाड़ी भी मौके पर तैनात थी और सुरक्षा के लिए मुख्य गेट को बंद किया गया था, जबकि पैदल आने-जाने का रास्ता खुला छोड़ा गया था, जहां सुरक्षाकर्मी तैनात थे।
इन धाराओं के तहत केस दर्ज
कृष्ण उर्फ गोलू, रामफल, अशोक उर्फ पप्ल, संदीप, सुभाष चंद्र, दलेल सिंह, अजीत और उमेद आदि के खिलाफ एफआईआर नंबर-75 के तहत वर्ष 2017 में केस दर्ज हुआ था। इनके खिलाफ धारा 307, 506, 147, 149, 148, 302, 325, 303, 120बी, 109 के तहत हांसी सदर थाने में केस दर्ज किया गया था।
दो लोगों को किया गया था बरी
उल्लेखनीय है कि दो मार्च को अदालत ने आठ लोगों को दोषी करार दिया था। मामले में 23 नामजद के अलावा दो अन्य भी अदालत में पेश हुए थे। इसमें दफा 216 के मामले में दो लोगों को अदालत ने बरी कर दिया था, जबकि आठ को दोषी करार देते हुए सजा के लिए पांच मार्च निर्धारित की थी।
प्लॉट का था झगड़ा
शेखपुरा गांव में बलबीर गुुर्जर गुट और सुभाष गुर्जर गुट में प्लॉट को लेकर झगड़ा था। इसका परिणाम यह हुआ कि 13 मार्च 2017 को फाग के दिन यही झगड़ा खूनी संघर्ष में बदल गया। संघर्ष के दौरान गोलियां भी चली थीं। गोली लगने से बलबीर गुर्जर के भतीजे मुकेश, प्रदीप फौजी और रामकुमार कसाना की मौत हो गई थी। मामले में हांसी सदर थाना पुलिस ने शेखपुरा निवासी संजय की शिकायत पर 23 नामजद व चार-पांच अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
डीएसपी पर भी लगे थे आरोप
इस मामले में डीएसपी भगवानदास पर भी आरोप लगाए गए थे। डीएसपी का तबादला हिसार से पंचकूला कर दिया था। पंचकूला में अपने क्वार्टर में डीएसपी ने सुसाइड नोट लिखकर सर्विस रिवाल्वर से आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में रामचंद्र, सत्यनारायण, दिनेश, विक्रम, सतपाल, सुरेश, हरीपाल, जयपाल, पवन, अनूप, भूप सिंह, मोहित, मोहित, रामफल और हवा सिंह का 319 सीआरपीसी के तहत हाईकोर्ट में केस विचाराधीन है।
किस धारा में कितनी सजा और जुर्माना
दोषी : अशोक, उम्र : 35
धारा सजा जुर्माना अतिरिक्त सजा
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : उमेद, उम्र : 40
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : अजीत, उम्र : 38
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : कृष्ण, 25
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : रामफल, उम्र : 45
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : दलेल, उम्र 65
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : सुभाष, उम्र : 50
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
25 दो वर्ष दो हजार एक माह
दोषी : संदीप, उम्र : 21
302 उम्रकैद 25 हजार एक वर्ष
307 सात वर्ष 10 हजार छह माह
325 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
323 एक वर्ष
506 एक वर्ष
147 एक वर्ष
148 दो वर्ष दो हजार एक माह
27 तीन वर्ष पांच हजार तीन माह
दोषी पक्ष के वकील बोले - हाईकोर्ट में जाएंगे
मामले में दोषी पक्ष से अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन ने कहा कि हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। जिन दोषियों को सजा हुई है, उनकी ओर से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।
पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा - फैसले से परिजन संतुष्ट
मामले में पीड़ित पक्ष से अधिवक्ता जेएस मल्ही ने कहा कि अदालत के फैसले से मृतकों के परिजन संतुष्ट हैं। अगर दोषी पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई तो पीड़ित पक्ष की ओर से भी हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा।
पीड़ित पक्ष बोला - आरोपियों को फांसी होनी चाहिए थी
शुक्रवार को फैसले के दौरान मृतक मुकेश के ताऊ बलबीर, मृतक रामकुमार का बेटा संजय, मृतक प्रदीप का भाई दयानंद और संदीप, उमेद, देव व अन्य मौजूद रहे। संजय ने कहा कि वे अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन हम इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। आरोपियों को फांसी होनी चाहिए थी, जिसके लिए हम जल्द ही हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
झगड़े के समय डीएसपी की बेटी पूजा थीं सरपंच
वर्ष 2016 के पंचायती चुनाव में डीएसपी भगवानदास की बेटी पूजा शेखपुरा गांव की सरपंच चुनी गई थीं। साल 2019 में उनकी नौकरी लग गई और उन्होंने सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद गांव के सरपंच पद का कार्यभार पंचायत सदस्य भतेरी यादव को सौंप दिया गया। वैसे झगड़े के समय पूजा सरपंच थीं और झगड़े की वजह भी पंचायती चुनाव थे। दोनों गुट गुर्जर समाज से संबंधित हैं।

दोषियों को अदालत में पेश कर वापस ले जाती पुलिस। - फोटो : Hisar

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