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एडवोकेट सुभाष गुप्ता की हत्या मामले में सभी सात दोषियों को आजीवन कारावास

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एडवोकेट सुभाष गुप्ता हत्याकांड के आरोपियों को सजा सुनवाने के लिए अदालत में लेकर जाते पुलिसकर्मी - फोटो : Hisar
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एडवोकेट सुभाष गुप्ता की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए सात दोषियों को एडीजे वेद प्रकाश सिरोही की अदालत ने शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर 55-55 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर सभी आरोपियों को दो साल और तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने सभी आरोपियों को शुक्रवार को दोषी करार दिया था। दोषियों में मृतक एडवोकेट सुभाष गुप्ता का समधी एवं गैस एजेंसी संचालक रामपुरा मोहल्ला निवासी पवन बंसल और उसकी एजेंसी पर काम करने वाले सैनियान मोहल्ला निवासी पवन उर्फ पांडा, सुनील, कुलदीप व गुलशन, मीरकां निवासी नरेश और समैण निवासी संजीव उर्फ सोनू शामिल हैं।
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सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस संबंध में 24 जनवरी 2017 को केस दर्ज किया था। सुभाष गुप्ता के ड्राइवर शिवनगर निवासी लक्ष्मीनारायण ने पुलिस को बयान दिया था कि वह सुभाष गुप्ता के यहां नौ साल से ड्राइवर का काम करता है। वारदात वाले दिन वह इनोवा कार में उन्हें कोर्ट परिसर से लेकर करीब 3:40 बजे उनके अर्बन एस्टेट-2 स्थित घर की ओर जा रहा था। जब वह टाउन पार्क के समीप पहुंचा तो अचानक एक युवक ने उनकी कार के आगे अपनी बाइक अड़ा दी। इस पर उसने कार रोकी तो वहां खाली प्लॉट से 7-8 युवकों ने अचानक कार पर हमला बोल दिया। उनके हाथों में डंडे लिए हुए थे। कार के शीशे तोड़कर हमलावरों में से एक युवक ने कार में पीछे की सीट पर बैठे गुप्ता पर चाकू से हमला कर दिया। ड्राइवर के अनुसार पीछे दूसरी कार में सुभाष का बेटा एडवोकेट कमल गुप्ता आ गया। उसने हमला देखकर शोर मचा दिया, जिससे हमलावर मौके से फरार हो गए। घायल सुभाष गुप्ता को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
ये था हत्या का कारण
एडवोकेट सुभाष गुप्ता और पवन बंसल समधी थे। पवन बंसल की बेटी शालू की शादी सुभाष गुप्ता के बेटे रोज गुप्ता के साथ वर्ष 2009 में हुई थी। उन्हें एक संतान भी थी, लेकिन बाद में किसी बात पर अनबन शुरू हो गई। वारदात से कुछ माह पहले ही शालू अपने मायके में रहने लगी थी। एक दिन शालू रो पड़ी तो पवन बंसल अंदर से बदले की आग में जल उठा। उसने अपनी गैस एजेंसी में काम करने वाले अपने खास नरेश से बात की और सुभाष गुप्ता की हत्या की साजिश रच डाली। इसके बाद सुभाष गुप्ता की रेकी की गई और फिर साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया।
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रिश्ते में खटास और बेटी के आंसुओं ने पहुंचाया पवन बंसल को जेल
पवन बंसल की बेटी के ससुराल में रिश्ते में खटास पैदा होने के बाद दोनों परिवारों में विवाद बढ़ता जा रहा था। इसके चलते दोनों परिवारों में कई बार पंचायत भी हुई थी, लेकिन समझौता नहीं हो पाया। बताते हैं कि एक बार पंचायत में पवन बंसल ने तैश में आकर पिस्तौल निकाल ली थी, लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते उसे बात को खत्म कर दिया गया था। उसके बाद उसकी बेटी जब उसके सामने रोती तो उसके सीने में धधकती बदले की भावना बलवती होती चली गई। इसका अंजाम यह हुआ कि शालू के रिश्ते में खटास और उसके आंसुओं से पवन बंसल के सीने में पैदा हुई बदलने की भावना ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाई हत्या की गुत्थी
एडवोकेट गुप्ता की हत्या का मामला सिविल लाइन थाने में दर्ज किया गया था, लेकिन तत्कालीन आईजी ओपी सिंह ने इस मामले को पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स के हवाले कर दिया था। मामला हाथ में लेने के तुरंत बाद टास्क फोर्स ने तहकीकात शुरू कर दी और अगले ही दिन पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया था। मामले के सभी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। साथ ही हत्या में प्रयोग की गई गाड़ी और चाकू के टुकड़े भी बरामद कर लिए थे।
शक ने करवाई पवन बंसल की गिरफ्तारी
एडवोकेट सुभाष गुप्ता की मौत के बाद पवन बंसल की ओर से कोई भी शोक जताने न तो अस्पताल पहुंचा और न ही उसके घर पर। इस बात ने पुलिस में शक पैदा किया और जैसे ही टास्क फोर्स ने अपनी जांच इस दिशा में घुमाई तो एक के बाद एक-एक कड़ियां जुड़ती चली गईं। पवन बंसल और उसके बाद नरेश की गिरफ्तारी ने इस हत्या के मामले से पर्दा हटा दिया।
मुंह छिपाते हुए पहुंचा कोर्ट
एडवोकेट सुभाष गुप्ता की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए पवन बंसल समेत सभी दोषियों को कोर्ट परिसर स्थित बख्शीखाने से अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच ले जाया गया। एएसआई राजेंद्र सिंह की निगरानी में इन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान बख्शीखाने से अदालत पहुंचने तक पवन बंसल ने अपना चेहरा हाथों से छिपाने का प्रयास किया, जबकि बाकी दोषी सामान्य रूप से चलते रहे।
किस धारा के तहत क्या-क्या सजा
धारा - सजा - जुर्माना - जुर्माना फाल्टी
148 - एक साल - 00 - 00
302 - आजीवन कारावास - 25000 रुपये - एक साल
120 बी - आजीवन कारावास - 25000 रुपये - एक साल
201 - तीन साल - 5000 रुपये - तीन माह
427 - छह माह - 00 - 00
मृतक का बेटा बोला- हम अदालत के फैसले से संतुष्ट
हमारी 2009 में शादी हुई थी। कुछ पारिवारिक विवाद था, जिसके चलते पवन बंसल ये कहते हुए कि मेरी बेटी को हमारे कहे अनुसार रखो और हमें जान से मारने की बार-बार धमकी देता था, जिसे हमने गंभीरता से नहीं लिया। बाद में उसने अपनी कही को पूरा कर दिया और मेरे पिता की हत्या कर दी। हम अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं और अन्याय पर न्याय की जीत हुई है।
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- एडवोकेट रोज गुप्ता, पुत्र स्व. सुभाष गुप्ता
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