हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मंगलवार को हिंदी विभाग और वाणिज्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संगोष्ठी हिंदी और भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता विषय पर हुई। इसमें कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
प्रो. शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का संचारक है। मातृभाषा को आत्मगौरव के साथ दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। आज दुनिया के लगभग 200 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है, और यह भारत की एकात्मकता का प्रतीक बन चुकी है।
कुलपति प्रो. बिश्नोई ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने की यात्रा में हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी अब साहित्य तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल युग की प्रमुख भाषा बन चुकी है। डॉ. रीता सिन्हा ने बताया कि हिंदी विश्व स्तर पर तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह देश की विविधताओं को आत्मसात कर जोड़ने का कार्य करती है और अब वैश्विक बाजार में भी एक सशक्त भाषा के रूप में उभर रही है। इस अवसर पर डॉ. सोनिका ठाकुर, डॉ. साहिल कौशिक, डॉ. पुष्पा रानी, डॉ. कुसुमलता सहित कई शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।