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लंपी : टीकाकरण का मिला फायदा, हिसार में पड़ोसी जिले से कम है असर

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हिसार। रविवार को जिले में केवल 11 पशु लंपी से संक्रमित मिले। इस बीमारी से किसी पशु की मौत नहीं हुई, जहां 11 पशु संक्रमित मिले हैं, वहां पहले से ही अन्य पशु संक्रमित हैं। पशुपालन विभाग के अफसरों का मानना है कि जहां टीकाकरण हो चुका है, वहां पशुओं के बीमार होने की सूचना नहीं मिल रही है। जिले में इस बीमारी से संक्रमित होने वाले व पशुओं की मौत का आंकड़ा अन्य जनपदों से कम है।
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पड़ोसी जिला सिरसा में हिसार के मुकाबले छह गुना अधिक केस है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार शनिवार 10 सितंबर तक सिरसा में 6427 पशु संक्रमित थे। इनमें 100 से अधिक भैंस भी संक्रमित हुई हैं, जबकि हिसार में केवल एक भैंस ही संक्रमण पाया गया है और वह भी ठीक हो चुकी है। इसके अलावा फतेहाबाद में भी 1896 पशु संक्रमित हो चुके हैं। फरीदाबाद में 2203 और पलवल में 2117 पशु लंपी की चपेट में आ चुके हैं। सबसे खराब स्थिति करनाल जिले की है। वहां 10 सितंबर तक 11832 पशु लंपी की चपेट में आ चुके थे।
कहां कितने पशु मिले संक्रमित
जिला पशु
हिसार 1104
सिरसा 6427
फतेहाबाद 1896
करनाल 11832
61 गांवों और 9 गोशालाओं में फैली बीमारी
हिसार जिले में लंपी का पहला केस जुलाई के अंतिम सप्ताह में अग्रोहा की एक गोशाला में मिला था। अब तक यह बीमारी 61 गांवों व 9 गोशालाओं में फैल चुकी है। परंतु राहत की बात यह है कि टीकाकरण होने से संक्रमण की रफ्तार अब धीमी पड़ चुकी है। पशुपालन विभाग से मिले जानकारी के अनुसार रविवार को केवल 11 नए संक्रमित केस मिले, जिनमें से 10 ग्रामीण क्षेत्र में तथा एक गोशाला में है। ये सभी केस पहले से संक्रमित गांव व गोशाला से ही हैं। जिले में अब तक 1104 पशु संक्रमित हुए हैं जिनमें से 928 पशु ग्रामीण क्षेत्र में था 176 पशु गोशालाओं के हैं।
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एसडीओ डॉ. रविंद्र कौशिक का बताते हैं कि सबसे पहले टीकाकरण उन क्षेत्रों में कराया गया, जहां पशु संक्रमित हुए थे। इससे संक्रमण को एक निश्चित क्षेत्र में रोकने में मदद मिली। इसके बाद तेजी से पूरे जिले में टीकाकरण करा दिया। अब केवल 12 हजार पशुओं का टीकाकरण बाकी है। सतर्कता व टीकाकरण के चलते बीमारी का असर कम दिख रहा है।
अब तक 977 पशु हो चुके हैं स्वस्थ
पशुपालन विभाग के रिटायर उप निदेशक श्रीभगवान ने बताया कि एलएसडी ग्रसित पशुओं का जल्दी उपचार तथा देखरेख होने पर जल्दी स्वस्थ भी हो रहे हैं। शनिवार तक संक्रमित पशुओं में से ग्रामीअण क्षेत्र के 826 और गोशाला के 151 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 35 व गोशालाओं में चार पशुओं की मौत इस बीमारी के चलते हुई है। जो पशु पहले से कमजोर हैं, जिनमें न्यूमोनिया के लक्षण हैं उनमें इसका असर अधिक दिख रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि बीमार पशु को अगर सांस लेने में दिक्कत है तो उन्हें तारपीन का तेल गर्म पानी में डालकर भाप दिलाने से राहत मिलती है।
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