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Hisar News: हैंडबाल से गांव लाडवा की पहचान, अब तक 40 खिलाड़ी खेल उपलब्धियों से पा चुके सरकारी नौकरी

Mon, 10 Mar 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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हिसार के गांव लाडवा में हैंडबाल का अभ्यास करते ​​खिलाड़ी।
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हिसार। हिसार से 13 किलोमीटर दूर गांव लाड़वा। करीब 12,000 की आबादी वाले इस गांव की पहचान आज हैंडबाल खिलाड़ियों से जानी जाती है। वर्तमान में यहां 125 लड़के और लड़कियां देश के लिए पदक जीतने के लिए सुबह-शाम पसीना बहा रहे हैं। बड़ी उपलब्धि ये है कि 40 खिलाड़ी खेल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं।
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गांव के खिलाड़ी पुलिस, आर्मी, रेलवे और एसएसबी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब तक 10 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। वर्ष 2002 में लाडवा में हैंडबाल की शुरुआत डीपीई जयभगवान पानू ने की थी। शुरुआत में 30 से 35 खिलाड़ी अभ्यास करने पहुंचे। मगर 2010 में गांव के ही सीनियर खिलाड़ी अशोक पूनिया और महावीर पूनिया ने खिलाड़ियों को तराशना शुरू कर दिया। बेटियों की रुचि को देखते हुए एक साल बाद ही उन्होंने लड़कियों का खेल सेंटर भी शुरू कर दिया। आज गांव के बेटे और बेटियां न केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं, बल्कि सरकारी नौकरी भी पा चुके हैं। गांव के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में खिलाड़ी हैंडबाल का अभ्यास कर रहे हैं।

खिलाड़ियों के पदक आए तो खेल विभाग ने दी दो नर्सरी
लाडवा के हैंडबाल खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। खिलाड़ियों ने स्टेट से लेकर नेशनल चैंपियनशिप में पदक जीते। खिलाड़ियों के बेहतर परिणाम को देखते हुए खेल विभाग ने गांव में दो खेल नर्सरी शुरू की। पिछले वर्ष लड़कियों की खेल नर्सरी शुरू की तो तीन साल से लड़कों की खेल नर्सरी चल रही है।
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अब तक 100 से ज्यादा खिलाड़ी ले चुके नेशनल प्रतियोगिता में भाग
अब तक गांव के 100 से ज्यादा खिलाड़ी नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं। इसी प्रकार 150 से ज्यादा खिलाड़ी स्टेट लेवल की स्पर्धा पर दमखम दिखा चुके हैं। वर्तमान में अभ्यास कर रहे 125 खिलाड़ियों में से 50 खिलाड़ी नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं। गांव की ही बेटी खुशबू भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हैं।

गांव में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का होता है सम्मान
यदि गांव का कोई भी खिलाड़ी पदक जीतकर लाता है तो उसका पंचायत की ओर से सम्मान किया जाता है। विजयी जुलूस निकाला जाता है। गांव में खिलाड़ियों के पदक आए और उन्हें सम्मान मिला तो काफी युवाओं ने हैंडबाल में ही कॅरिअर बनाने की ठानी।


मैंने पांचवीं कक्षा से हैंडबाल खेलना शुरू किया था। चार बार नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हूं। इसमें से दो में स्वर्ण पदक हासिल किया। खेल उपलब्धियों के आधार पर 10 मार्च 2023 को मेरी ग्रुप डी में नौकरी लगी थी। अभी मैं हिसार में एडीसी कार्यालय में कार्यरत हूं। - सपना टंडन

गांव से 14 वर्ष पहले मैंने हैंडबाल से कॅरिअर की शुरुआत की थी। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया था। इस आधार पर मेरी 2023 में पुलिस में नौकरी लगी। अभी मैं लखनऊ में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हूं। - अजय गिल

आठ वर्ष पहले मैंने हैंडबाल खेलना शुरू किया था। अब तक आठ बार नेशनल खेल चुकी हूं। सात में पदक हासिल किए हैं। 2024 में खेल के आधार पर रेलवे में नौकरी हासिल की थी। अभी मैं छतीसगढ़ में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हूं। गांव लाडवा से ही मैंने हैंडबाल खेलने की शुरुआत की थी। - सुरक्षा पंघाल

गांव में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। सुबह-शाम पांच से छह घंटे खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। अब तक गांव के 40 खिलाड़ी सरकारी नौकरी लग चुके हैं। भविष्य में और भी गांव से खिलाड़ी निकलेंगे और पदक जीतकर नाम रोशन करेंगे। - अशोक पूनिया, कोच, हैंडबाल


खिलाड़ियों के बेहतर परिणाम को देखते हुए खेल विभाग ने दो नर्सरी दी हैं। वर्तमान में 125 खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर खिलाड़ियों ने पहचान बनाई है। - महावीर पूनिया, कोच, हैंडबाल

आज गांव के खिलाड़ी नेशनल स्तर पर पदक जीतकर नाम रोशन कर रहे हैं। खेलों को लेकर खिलाड़ियों को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। समय-समय पर खिलाड़ियों को पंचायत की ओर से खेलों का सामान भी दिया जाता है। आज लाडवा की पहचान खेल के नाम से जानी जाती है। जल्द ही गांव में पंचायत की ओर से नेशनल चैंपियनशिप करवाई जाएगी। - रामफल पूनिया, सरपंच, लाडवा
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