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Hisar News: कविता का दर्द...पति ने छोड़ा, अपनों ने नाता तोड़ा तो मोक्ष आश्रम में मिली पनाह

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मोक्ष आश्रम में बुजुर्ग को दवा देतीं कविता। 
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शिवानी सेहरा
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हिसार। पांच-भाई बहनों में सबसे छोटी होने के कारण घर में सबकी लाडली थी। सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए ट्यूशन पढ़ाती, ताकि परिवार पर बोझ न बनूं। नोएडा में जॉब कर रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर से शादी तय हुई। एक साल बाद बिटिया को जन्म दिया। जीवन हंसी-खुशी चल रहा था..पर वर्तमान दौर में बिगड़ते सामाजिक ताने-बाने ने मेरी खुशियों पर भी ग्रहण लगा दिया। अपनी पीड़ा बताते हुए मोक्ष वृद्धाश्रम में रहने वाली कविता का दर्द फूट पड़ा।
गाजियाबाद निवासी कविता ने बताया 2010 में शादी के कुछ साल बाद पति के साथ छोटी-छोटी बातों पर कहासुनी होने लगी, इससे दोनों में दूरियां बढ़ने लगीं। आखिर पति ने छोड़ दिया। इस घड़ी में मुझे ससुराल वालों के अलावा मायके पक्ष का साथ भी नहीं मिला। इससे मैं डिप्रेशन में आ गई। 2017 में मायके आ गई और पति से अलग रहने लगी। इस बीच परिजनों ने ससुराल पक्ष से बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। आखिर 2018 में तलाक हो गया। मेरी मानसिक हालत और बिगड़ती गई। दो साल पहले परिजन मोक्ष वृद्धाश्रम में छोड़कर चले गए। 8-9 महीने तक किसी ने सुध तक नहीं ली। अब यही आश्रम जीने का सहारा है। यहां रहने वाले लोगों की सेवा करते-करते मेरा जीवन चल रहा है। (संवाद)
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दो साल से आश्रम में हूं

मैं दो साल से आश्रम में हूं। डिप्रेशन के कारण यहां छह महीने इलाज चला। इस दौरान मैं किसी से बात नहीं करती थी, न ही मुझे खाने-पीने का होश रहता था। लगातार इलाज चलने से हालत में सुधार हुआ और धीरे-धीरे दवाइयां भी कम हो गईं। अब आश्रम में मैनेजमेंट का काम भी संभाल रही हूं।
13 साल की बेटी पिता के साथ कनाडा में
कविता ने बताया बेटी 13 साल की हो गई है और अपने पिता के साथ कनाडा में रह रही है। 2018 में आखिरी बार उससे मिली थी। तलाक के बाद बेटी से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन नहीं करवाई। पिछले एक साल से पति कनाडा गए हैं।


यहीं रहकर आजीवन बुजुर्गों की सेवा करूंगी
कविता ने बताया जब मैं डिप्रेशन में थी, तब मोक्ष वृद्धाश्रम वालों ने मुझे सहारा दिया। मेरा उपचार करवाया। आश्रम संचालक पंकज संधीर, विजय भृगु व अन्य सदस्यों ने डिप्रेशन से निकालने में मेरी बड़ी मदद की। मुझे कभी हताश नहीं होने दिया। अब परिजन आश्रम से घर ले जाना चाहते हैं। अब मोक्ष आश्रम ही मेरा घर है। यहीं रहकर आजीवन बुजुर्गाें की सेवा करूंगी।
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परिजन आश्रम में छोड़कर गए थे

करीब दो साल पहले कविता को डिप्रेशन की हालत में उसके भाई-भाभी मोक्ष वृद्धाश्रम में छोड़कर गए थे। तब उसे किसी भी तरह की सुध नहीं थी। लगातार 6 महीने तक इलाज चला। पूरी तरह स्वस्थ होने में एक साल से ज्यादा समय लगा। अब वह स्वस्थ है और आश्रम में मैनेजमेंट का काम संभाल रहीं है। - विजय भृगु, मोक्ष वृद्धाश्रम संचालक।
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