ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने भारतीय न्याय संहिता 193 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने 14 अगस्त का चालान पेश किया, इसके 11 दिन बाद 25 अगस्त को एप्लीकेशन दी कि हम पूरी चार्जशीट नहीं दे सकते।
जासूसी के शक में गिरफ्तार ज्योति मल्होत्रा की अधूरी जांच के आधार पर डिफॉल्ट बेल मामले में पुलिस ने सोमवार को सिविल जज सुनील कुमार की अदालत में अपना जवाब दाखिल किया। ज्योति मल्होत्रा के वकील ने पुलिस की ओर से रखे गए तर्कों पर बहस की। अदालत ने दोनाें पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। पूरी चार्जशीट दिए जाने और डिफॉल्ट बेल मामले में अदालत मंगलवार को फैसला सुनाएगी। मंगलवार को ज्योति को अदालत में व्यक्तिगत तौर पर पेश किया जाएगा।
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सिविल जज सुनील कुमार की अदालत में दी गई एप्लीकेशन में पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा के मामले की मीडिया ब्रीफिंग पर रोक, पंचकूला लैब से प्राप्त डेटा का हिस्सा, ज्योति की चार्जशीट में सील चैट का हिस्सा न आरोपी को न देने की मांग की थी। इस पर 29 अगस्त को बहस के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि अभी हमारी जांच पूरी नहीं हुई है। ऐसे में संवेदनशील जानकारी देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए आरोपी पक्ष को खुफिया जानकारी नहीं दी जाए। कुमार मुकेश ने सरकारी वकील के इस बिंदु को आधार बनाते हुए ज्योति मल्होत्रा के लिए डिफॉल्ट बेल की याचिका दायर की है। जिस पर अदालत ने पुलिस से शनिवार को जवाब मांगा था। 30 अगस्त को पुलिस ने अदालत से एक सितंबर तक का समय मांगा था।
पूरा चालान देना ही होगा
ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने भारतीय न्याय संहिता 193 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने 14 अगस्त का चालान पेश किया, इसके 11 दिन बाद 25 अगस्त को एप्लीकेशन दी कि हम पूरी चार्जशीट नहीं दे सकते। 11 दिन बाद इस एप्लीकेशन का क्या अर्थ है। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का हवाला देकर पुलिस दस्तावेज देने से इन्कार नहीं कर सकती। पुलिस दोनों चालान की प्रति हमें दे, ताकि हम अपना जवाब तैयार कर सकें।