जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि जाट खेतीबाड़ी से जुड़े हैं, अब जाटों के पास नाममात्र जमीन बची है।
सरकार ने जाटों की जमीन हड़प ली है, जिससे जाटों के पास खेती के लिए जमीन ही नहीं बची है और जाट आर्थिक रूप से लगातार कमजोर हो रहा है।
जाटों को इस समय आरक्षण की जरूरत है। जाटों को एक वर्ष 13 दिन तक आरक्षण का लाभ मिला तो 24 हजार बेरोजगोरों को रोजगार मिल गया था। भाजपा सरकार ने राजनीतिक द्वेष भावना के चलते जाटों के आरक्षण को रद कर दिया, जिससे जाटों को बड़ा झटका लगा है।
जाट अपनी आरक्षण की मांग को लेकर दिल्ली का दूध, पानी, सब्जी बंद नहीं करेंगे, बल्कि अपने हकों के लिए खून की नदियां बहा देंगे। पूरे देश में जाट ब्रिगेड की भर्तियां और ट्रेनिंग चल रही हैं। मलिक बुधवार को सिवानी बोलान गांव में जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जाटों ने कभी भी किसी जाति के आरक्षण का विरोध नहीं किया। कुछ राजनीतिक लोग जाटों के आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, जिससे सामाजिक माहौल व भाईचारा खराब हो गया है। इस विरोध से गांवों में लगातार जातिवाद पैदा हो रहा है।
देश में 2390 जातियों को आरक्षण दिया गया है, फिर जाटों का आरक्षण रद क्यों किया गया। भाजपा सरकार जाटों को बर्बाद करना चाहती है। उन्होंने कहा कि 13 सितंबर को आरक्षण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ तीन युवा शहीद हो गए थे। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि और सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए मय्यड़ गांव में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा। अगर सरकार किसी तरह की ज्यादती करेगी तो जाट चुप नहीं बैठेंगे।
मलिक ने कहा कि सरकार जाट आरक्षण बिल लेकर आए और इसे कानून बनाकर पास करे, ताकि कोई अड़चन न आने पाए। हम सरकार से आरक्षण मांग रहे हैं, उसे लेकर ही दम लेंगे।
इस मौके पर रामभगत मलिक, बीएस अहलावत, धर्मपाल लोहचब, कृष्ण पंवार, नफेसिंह, अमन कुलेरी, चांदीराम, जगदीश सिहाग, लीला राम, अजीत सिंह, शमशेर सिहाग, रामेहर भुक्कर, राजेश भुक्कर, रविंद्र सिहाग, मनफूल पोषक, झाबर किरमारा, सितेंद्र लोहचब, धर्मबीर सहित अनेक समाज बंधु उपस्थित थे।