हांसी। बिजली बिल की समस्या हो या फिर एक्सईएन के कार्यालय में कोई काम हो, जल्द ही लोगों को एक जगह से दूसरी जगह नहीं भागना पड़ेगा। एक ही परिसर में सभी समस्याओं का समाधान होगा। बिजली निगम की ओर से रेलवे रोड पर एक्सईएन कार्यालय परिसर में ही शहरी व ग्रामीण कार्यालयों का एक साथ निर्माण करवाया जा रहा है।
इसमें एक कार्यालय का भवन बनकर तैयार हो गया है। वहीं दूसरे कार्यालय के भवन का भी काम अंतिम चरण पर है। दोनों भवनों का निर्माण अलग-अलग किया जा रहा है। भवनों के निर्माण के बाद उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित कार्य के लिए एक जगह से दूसरी जगह नहीं भागना पड़ेगा। शहरी व ग्रामीण कार्यालय का निर्माण 135-135 लाख रुपये से करवाया जा रहा है। इन भवनों को आधुनिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इन भवनों को एक मंजिला बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। ठेकेदार द्वारा भवन निर्माण का कार्य बीते वर्ष शुरू कर दिया गया था। दोनों भवनों का निर्माण कार्यकारी अभियंता कार्यालय के सामने किया जा रहा है। भवन तैयार होने के बाद पुराने कार्यालय को यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।
भवन में ये बनेंगे कार्यालय
विभाग की और से तैयार किए गए डिजाइन के अनुसार दोनों भवनों का एक जैसा निर्माण किया गया है। भवन में एसडीओ रूम, जेई रूम, सीसी रूम, यूडीसी रूम, सीए रिकॉर्ड रूम, पूछताछ कक्ष, एलडीसी हाल, डीईओ रूम, सीए रूम, कैशियर रूम, ऑडिट रूम, रसोइघर, सर्वर रूम व पांच शौचालय का निर्माण किया गया है।
एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक जाने के लिए तय करना पड़ता था 2 किलोमीटर का सफर
शहर के लोगों को जब भी बिजली संबंधित समस्या को लेकर भिवानी रोड पर बनाए गए एसडीओ सिटी बिजली कार्यालय के बाद एक्सईएन कार्यालय जाना पड़ता था तो उन्हें करीब 2 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। वहीं सब अर्बन कार्यालय भी रेलवे रोड पर है। लेकिन उसका भवन छोटा है व हालत खस्ता हो चुकी है। यहां कर्मचारियों के बैठने के लिए पर्याप्त बंदोबस्त नहीं है। अब जल्द एक ही परिसर में सभी कार्य हो सकेंगे। जिससे समय की बचत होगी।
1965 में किया गया था भवन का निर्माण
59 वर्ष पहले भिवानी रोड पर एसडीओ सिटी बिजली भवन का निर्माण किया गया था। मौजूदा समय से इस कार्यालय की हालत जर्जर हो चुकी थी। जिसके कारण किसी भी दिन यहां भयंकर हादसा हो सकता है। भवन की छत को बल्लियों के सहारे रोका हुआ है। बारिश के मौसम में भवन की टपकती छतों के बीच कर्मचारियों को काम करना पड़ता है। कई बार इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका था।