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बीआईएस को बनाया दिया हौव्वा, मार्का लेना है आसान

Sat, 06 Feb 2016 02:31 AM IST
अमर उजाला हिसार / ब्यूरो
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आईएसआई या बीआईएस मार्का को कुछ लोगों ने हौव्वा बना रखा है, जबकि इसे लेना सबसे आसान है। इस मार्का को लेने के बाद उत्पाद की गुणवत्ता की साख बढ़ती है और उपभोक्ताओं में विश्वास पैदा होता है। मार्का के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
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उद्योगपतियों को जागरूक करने के उद्देश्य से हिसार उद्योग संघ की ओर से टेक्नोलॉजी व क्वालिटी विषय पर शुक्रवार को निकुंज गार्डन में आयोजित सेमिनार में बीआईएस के तेजपाल सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बीआईएस का मार्का आसानी से लिया जा सकता है, लेकिन इसके नियमों और मापदंडों को लगातार फॉलोअप करना होता है। इंडिया के साथ व्यापार करने वालों को भी ब्यूरो इंडियन स्टैंडर्ड यानि बीआईएस का सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया।

सेमिनार में एमएमई करनाल के असिस्टेंट डायरेक्टर विजेंद्र कुमार ने भी जानकारी दी। हिसार उद्योग संघ के महासचिव अजय बत्रा ने लोगों का स्वागत किया। सेमिनार में हिसार इंडस्ट्रीज के महासचिव जगदीश जिंदल, राजेंद्र मोदी, सीताराम लोहिया, प्रवीण ठाकुर, नरेंद्र गोयल, रणधीर गुप्ता, दीपक कुकरेजा, संजय गोयल, प्रदीप जैन, रिंकल बत्रा, राजीव गर्ग, राजीव सेठी आदि उद्योगपति मौजूद थे।
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इसलिए जरूरी है मार्का
सेमिनार में बताया कि प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए क्वालिटी जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तभी टिक पाएंगे। इसके लिए अपने उत्पाद के लिए आईएसआई या बीआईएस का सर्टिफिकेट लेना चाहिए। हालांकि फूड प्रोसेसिंग व मेडिकल यूनिट को छोड़कर सभी को लेना अनिवार्य नहीं है।

इसलिए जरूरी है पंजीयन
उद्योगपतियों को अपनी यूनिट को एमएसएमई से पंजीयन कराना भी आवश्यक है। इसके कई फायदे हैं। सेमिनार में एमएसएमई-डीआई करनाल के असिस्टेंट डायरेक्टर एमके वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भाग लेने, अपनी स्टॉल लगाने के लिए और सरकार द्वारा देय सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एमएसएमई से पंजीयन कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि डिपार्टमेंट साल भर में पचास से साठ ट्रेड फेयर जैसे आयोजन करता है। इसके अलावा सरकार को आपूर्ति करने के लिए यूनिट का पंजीकृत होना जरूरी है।

जागरूक नहीं है उद्योगपति
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाले उद्योगपति सरकारी नियमों और सुविधाओं से वाकिफ नहीं है। जागरूकता के अभाव में ना तो आईएसआई मार्का के लिए आवेदन करते हैं और ना ही अपनी यूनिट को पंजीकृत कराते हैं। हिसार उद्योग संघ के प्रधान देवेंद्र जैन ने बताया कि एमएसएमई में महज दस से पंद्रह फीसदी उद्योगपति पंजीकृत हैं।

मार्का का दुरुपयोग करने वालों की करें शिकायत
बीआईएस, आईएसआई जैसे मार्का का दुरुपयोग करने वालों या जिसे सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया वह मार्का का उपयोग कर रहा है तो उसकी शिकायत विभाग की साइट पर या आई कोर को शिकायत की जा सकती है।

सोने के आभूषण में सर्वाधिक खोट
सेमिनार में बीआईएस के अधिकारी तेजपाल सिंह ने बताया कि सोने के आभूषणों में सबसे अधिक मिलावट की जा रही है। उन्होंने बताया कि सोने के अधिकांश आभूषणों में 20 से 25 फीसदी टांका रहता है यानि खोट रहती है। सोने के आभूषण में शुद्धता को लेकर सरकार काफी चिंतित है। इस विषय में सरकार और अधिकारी काम कर रहे हैं।

क्या है बीआईएस मार्का
बीआईएस मार्का एक मानक है, जिसमें उत्पाद या निर्मित माल का मानक तय किया जाता है। ताकि भारतीय यूनिटों की साख बनी रहे और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में टिक सकें। निर्यात के लिए यह मार्का जरूरी होता है। यह विभाग भारत सरकार के अधीन है और 1986 के एक्ट के तहत काम करता है। इसका मानक भवन नई दिल्ली में है। आईएसआई और बीआईएस में ज्यादा अंतर नहीं है। देशभर में इसके पांच रीजनल ऑफिस और 34 शाखाएं हैं।
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