डीएमसी वीरेंद्र सहारण के कार्यालय में दो घंटे तक यहां जांच चली। इस दौरान नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, एमई, जेई व प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारी उपस्थित रहे। नगर परिषद प्रधान प्रवीन ऐलावादी, उपप्रधान अनिल बंसल, पार्षद आशीष पिंकू, शंटी भुजेजा, धर्मवीर मजोका, सुभाष, पार्षद प्रतिनिधि ज्योति कामरा, विनोद सिंगला जांच में शामिल हुए। जांच के दौरान पार्षदों ने शिकायतों से संबंधित दस्तावेज भी दिए। पार्षदों ने अधिकारियों को बताया कि प्रॉपर्टी टैक्स से संबंधित फाइलें ऑनलाइन ली जाती है, लेकिन अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के लिए फाइल ऑनलाइन ली थी। एक 4928 वर्ग गज जमीन का टैक्स 5700 रुपये लिए गए। आरोप है कि इस दौरान घोटाला हुआ। इसके अलावा अन्य प्रॉपर्टी यूनिट भी हैं जिनका टैक्स कटौती कर नाममात्र लिया गया। इसके अलावा करीब 15-20 प्रॉपर्टी यूनिट को गलत तरीके से पुरानी यूनिट से लिंक कर दिया है। इसके अलावा ठेकेदारों को उनकी सिक्योरिटी काम करने के तीन महीने बाद दे दी गई। जो कि नियमानुसार तीन वर्ष बाद दिया जाना होता है।
बता दें कि बीते महीने प्रधान, उपप्रधान सहित 21 नगर पार्षदों ने दो पेजों की शिकायत को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो व शहरी स्थानीय निकाय के चीफ विजिलेंस अफसर को शिकायत की थी। शिकायत में परिषद के कार्यकारी अधिकारी व प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच पर आरोप लगाए थे। पार्षदों ने आरोप लगाया था कि नगर परिषद में पिछले 3 से 4 महीनों से ज्यादा भ्रष्टाचार चल रहा है। पांच महीने पूर्व में जो भी विकास कार्य किए गए थे। उनको कार्यकारी अधिकारी व लेखाकार द्वारा साजबाज करके बिना ऑडिट के ठेकेदारों की लाखों रुपये की पेमेंट व 10 प्रतिशत सिक्योरिटी का भुगतान कर दिया था। जिसके कारण सभी वार्डों में समान विकास कार्य नहीं हो पाए।
बुधवार को भी हुई थी जांच
वहीं बुधवार को भी एएमसी कार्यालय में एक शिकायत के संदर्भ में जांच हुई थी। परिषद कार्यालय के पास सीएससी सेंटर चलाने वाले विकास शर्मा ने सीएम, डिप्टी सीएम, गृहमंत्री, यूएलबी के डायरेक्टर सहित कई जगह बीते महीने शिकायत दी थी। शिकायत में कहा था कि अनअप्रूव्ड क्षेत्र को जानबूझकर अप्रूव्ड दिखाया और एक जगह की प्रॉपर्टी यूनिट बना कर टैक्स ले लिया। ऐसा 15-20 प्रॉपर्टी आईडी के साथ हुआ। इस दौरान भी परिषद के कार्यकारी अधिकारी व प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारी उपस्थित थे।