Inspired by father chose medical eduction and selected in Md medicine
- फोटो : Hisar
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में शिक्षा के क्षेत्र में मेहनत और लगन के साथ अपने सपनों को जुनून के साथ जीने वाले ही लक्ष्य को हासिल कर पाते हैं। यह मानना है कि हांसी के उत्तम नगर क्षेत्र निवासी दीक्षा शर्मा का। दीक्षा एमबीबीएस में गोल्ड मेडलिस्ट रही है। उनकी उपलब्धि यह है कि एमबीबीएस के बाद जनवरी-2020 में हुए ऑल इंडिया एनईईटी-पीजी टेस्ट में दीक्षा ने 3533वीं रैंक हासिल की।
उत्तराखंड के हलद्वानी के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमडी-मेडिसिन में उनकी प्लेसमेंट हुई है। वैसे तो ज्यादातर विद्यार्थी एमबीबीएस व डॉक्टर ऑफ मेडिसन में पोस्ट ग्रेजुएट के लिए एक साल ड्रॉप करते हैं, लेकिन उन्होंने पहली बार में ही दोनों जगह सफलता हासिल की। दीक्षा के पिता सतीश शर्मा जीवन बीमा हांसी कार्यालय में अधिकारी हैं, वहीं उनकी माता मंजू शर्मा एसडी मॉडर्न स्कूल में प्राध्यापिका हैं। बड़े भाई राघव शर्मा पिछले वर्ष दिल्ली में सिविल जज लगे हैं।
अमर उजाला से बातचीत में दीक्षा ने बताया कि उनके पिता सतीश शर्मा डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन किसी कारणवश वह नहीं बन पाए। अपने पिता से प्रेरित होकर उन्होंने मेडिकल को चुना। 10वीं कक्षा में उन्होंने एसडी मॉडर्न स्कूल में टॉप किया। इसके बाद वह दिल्ली चली गई और 12वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। पहली ही बार में उनका एमबीबीएस के लिए चयन हो गया। नागपुर के आईजीएमएस में उनका दाखिला हुआ। यहां एमबीबीएस में वह गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। इंटर्नशिप के बाद एमडी मेडिसन में पीजी के लिए तैयारी को लेकर एक साल ड्रॉप करने की बजाय उन्होंने ऑल इंडिया एनईईटी-पीजी की परीक्षा दी।
दीक्षा के बड़े भाई दिल्ली में हैं सिविल जज
दीक्षा के पिता सतीश शर्मा का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों पर नाज है। डेढ़ लाख डॉक्टरों में 3533वीं रैंक हासिल कर उनकी बेटी दीक्षा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिछले वर्ष उनका बड़ा पुत्र राघव शर्मा 2019 में सिविल जज लगा है। वहीं उनके छोटे पुत्र चिराग ने 10वीं कक्षा में एसडी मॉडर्न स्कूल में टॉप किया है।