भाटला के सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में अनुसूचित समुुदाय के लोगों की याचिका पर हिसार की विशेष अदालत ने एक आईपीएस अधिकारी सहित छह के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। जांच हिसार के एसपी करेंगे।
भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में 10 जुलाई 2017 को भाटला के पीड़ित अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा गांव के सरपंच प्रतिनिधि सहित कई लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए 504 506 505 व अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा के दर्ज होने के बाद गांव भाटला के सवर्णों ने भी गांव के अनुसूचित जाति के लोगों व उनके अधिवक्ता रजत कलसन के खिलाफ भी 153ए, 505 व भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि दोनों ही मामलों में धारा 153ए व 505 आईपीसी पुलिस ने ईजाद की थी, जिसमें पुलिस को हरियाणा सरकार के गृह मंत्रालय से आवश्यक परमिशन लेनी होती है, लेकिन हांसी पुलिस ने सवर्णों द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में तो हरियाणा सरकार के गृह विभाग से परमिशन ली, लेकिन दूसरे पक्ष द्वारा सामाजिक बहिष्कार के मामले में दर्ज कराए गए मुकदमे में गृह मंत्रालय से परमिशन नहीं मांगी।
इसको लेकर अनुसूचित पीड़ित याचिकाकर्ताओं ने हिसार की विशेष अदालत में एक याचिका दायर कर एसआईटी द्वारा उनके केस को जानबूझकर कमजोर करने और सवर्णों को फायदा पहुंचाने व मुकदमे में जरूरी परमिशन न लेने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर अब कोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हिसार के एसपी को एसआईटी के सदस्यों के खिलाफ जांच करने व जांच रिपोर्ट पांच अक्तूबर को अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।