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Hisar News: ब्रूसेलोसिस का बढ़ रहा संक्रमण, राजस्थान बार्डर से सटे इलाकों में सतर्कता जरूरी

Mon, 10 Jul 2023 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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हिसार। डॉ. महावीर सिंह, वैज्ञानिक, लुवास।
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हिसार। संक्रमित पशु का दूध पीने से इंसान में फैलने वाली बीमारी ब्रूसेलोसिस के राजस्थान में कई केस मिलने के बाद बार्डर से सटे हिसार व आसपास के जिलों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। एक बार अगर किसी पशु को यह बीमारी हो गई तो आजीवन जीवाणु उस पशु में बने रहते हैं। संक्रमित पशु का दूध पीने या गोशाला में जेर की सफाई के दौरान संपर्क में आने से इंसानों में भी यह बीमारी फैलती है। संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाले अन्य पशुओं में भी इस रोग का असर होता है। इस बीमारी के चलते पशुओं में गर्भपात हो जाता है। ऐसे में बार्डर इलाके के पशुपालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि ब्रूसेलोसिस एक संक्रामक रोग है, जो ब्रूसेला नामक जीवाणुओं से फैलता है। यह रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट, सुअर एवं कुत्तों में मिलता है। इससे डेयरी उद्योग को भारी नुकसान होता है। अभी बड़े मादा पशुओं को इस रोग से बचाने के लिए कोई सुरक्षित वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 4 से 8 माह की बछिया व कटड़ी को वैक्सीन लगती है, लेकिन बछड़ा या कटड़ा को इसकी वैक्सीन नहीं लगाई जाती है।
संपर्क में आए अन्य पशुओं में भी फैलती है बीमारी
संक्रमित पशु के गर्भनाल व जेर में इस रोग के जीवाणु अत्यधिक मात्रा में पाए जाते हैं। संक्रमित पशुओं की जेर के यह अन्य पशुओं में संक्रमण फैलता है। इसीलिए अगर 5 माह से अधिक का गर्भपात होता है, तो उस पशु की जांच जरूर करानी चाहिए। एलाइजा किट से जांच होने के चलते तुरंत परिणाम पता चल जाता है, जिसके बाद संक्रमित पशु को अन्य पशुओं से अलग-अलग कर दिया जाता है। इसलिए अगर कोई नया पशु खरीद रहे हैं तो उसकी ब्रूसेलोसिस की जांच जरूर करा लें।
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लुवास व प्रमुख पशु अस्पतालों में होती है इस रोग की जांच
इस बीमारी की जांच नजदीकी पशु चिकित्सालयों के अलावा लुवास के केंद्रीय प्रयोगशाला पशु चिकित्सा महाविद्यालय में भी 200 रुपये प्रति पशु की दर से की जाती है। एलाइजा किट से होने वाली जांच का तुरंत ही परिणाम भी मिल जाता है। डॉ. महावीर ने बताया कि प्रयोगशाला में जांच करवाने के लिए पशु चिकित्सक की सहायता से खून का नमूना नई सिरिंज में लें। खून लेने के बाद उसे एक घंटे तक छाया में रखें और खून जम जाने के बाद प्रयोगशाला में भिजवा दें। गर्भपात होने के 21 दिन बाद फिर से खून की जांच करवानी चाहिए।
बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए ये करें उपाय
इस बीमारी का पशुओं में इलाज नहीं है। इसलिए पशुपालक 4 से 8 माह की बछड़ी व कटड़ी को ब्रूसेला एस-19 वैक्सीन का टीकाकरण करवाएं। नर पशुओं में इस बीमारी का टीकाकरण नहीं करना चाहिए। पशुओं की जांच कराएं और संक्रमण की पुष्टि होने पर उसे अन्य पशुओं से अलग रखें। दूध को हमेशा उबालकर पीएं, कच्चा दूध पीने से बीमारी का संक्रमण फैल सकता है।
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ब्रूसेलोसिस रोग के लक्षण

- पशुओं में 5 माह के बाद गर्भपात होना।
- गर्भपात के बाद चमड़े जैसा जेर का निकलना।
- पशुओं में जेर रुकना एवं गर्भाश्य में सूजन।
- नर पशुओं में अंडकोष की सूजन।
- पशुओं के घुटनों में पानी भर जाना।
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