हिसार। अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसे महादान में रूप में भी देखा जाता है। यह ऐसा दान है जिसे करने से हम किसी दूसरे की जिंदगी बचा सकते हैं। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल में करीब 25 लोगों ने अपनी आंखें दान कर दूसरों की जिंदगी में प्रकाश किया है।
इनमें हिसार, सिरसा, फतेहाबाद सहित अन्य जिलों के लोग शामिल हैं। वहीं, 25 साल के दौरान अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में 250 बॉडी डोनेट हुई हैं। इनमें से 210 बॉडी पर मेडिकल के विद्यार्थियों ने रिसर्च किया है। अभी मेडिकल कॉलेज में 40 बॉडी और रखी हुई है। हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
बॉडी डोनेट करने की यह है प्रक्रिया
बॉडी डोनेट करने के लिए सबसे पहले फार्म में दी गई पूरी डिटेल भरनी होती है। उस फार्म पर परिवार की सहमति देनी होती है। फार्म पर डोनेट करने वाले की फोटो लगती है। उसका अलग से आई कार्ड बनता है। उसके बाद ही बॉडी या फिर अंगदान देने की प्रक्रिया होती है।
ये दे सकते हैं अंगदान
मृत्यु के बाद कई अंग और ऊतक दान किए जा सकते हैं। इनमें हृदय, फेफड़े, गुर्दे, आंत, त्वचा, हृदय वाल्व, हड्डियां आदि चीजें शामिल हैं। जीवित व्यक्ति भी कुछ अंगों का दान कर दूसरों की जिंदगी बचा सकते हैं। इनमें किडनी, अग्न्याशय का कुछ हिस्सा दान कर सकते हैं।
एक साल में करीब 25 लोगों ने अपनी आंखें दान कर दूसरों की जिंदगी में प्रकाश डाला है। फिलहाल 40 डेड बॉडी रखी हुई हैं। 210 डेड बॉडी पर शोध किया जा चुका है।
- अंकित, पीआरओ, अग्रोहा मेडिकल कॉलेज।