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दुधारू पशुओं की मौत का सिलसिला जारी, क्लोस्टिडियम कीटाणु के कहर की आशंका

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नंगथला गांव में दुधारू पशुओं की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार रात को एक पशु और बुधवार सुबह चार बजे एक कटड़े की मौत हुई। बुधवार को फिर लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डेयरी फार्म पर पहुंचे और दो मृत पशुओं का पोस्टमार्टम किया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने कुछ और पशुओं के सैंपल भी लिए हैं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पशुओं में क्लोस्टिडियम कीटाणु मिला है, जो मौत की वजह हो सकती है, हालांकि वैज्ञानिक अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार वीरवार दोपहर तक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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8 पशुओं का चल रहा इलाज
फिलहाल करीब 8 पशुओं का इलाज चल रहा है, जबकि डेयरी के बाकी पशु अभी तक स्वस्थ हैं। कुल करीब 110 पशुओं में से अब तक 43 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशु पालन विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. कल्पना ने बुधवार को भी डेयरी का दौरा कर हालात का जायजा लिया। पानी और चारे के सैंपल की रिपोर्ट आ गई है, जो सही पाई गई हैं।
दवाइयों का पूरा खर्च विभाग का
पशुओं के इलाज का पूरा खर्च पशुपालन विभाग उठा रहा है। आगामी दिनों में भी यह खर्च विभाग द्वारा ही उठाया जाएगा। राज्यमंत्री अनूप धानक और पशुपालन विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. कल्पना ने विभाग को निर्देश दिए थे कि पशुओं के इलाज को लेकर किसान का कोई पैसा नहीं लगना चाहिए।
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विभाग दिलवाएगा 50 लाख का बिना ब्याज का लोन
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. राजेंद्र वत्स ने बताया कि किसान को विभाग की विभिन्न स्कीमों की तहत पूरी सहायता दी जाएगी। इसके लिए सीधा अनुदान तो नहीं मिल पाएगा, लेकिन किसान को पशु खरीद के लिए 40 से 50 लाख का लोन दिलवाया जाएगा। यह लोन बिना ब्याज दिया जाएगा ताकि किसान के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।
यह था पूरा मामला
गांव नंगथला में एक-एक करके कई दुधारू पशुओं की मौत हो गई। शनिवार शाम से खाती-पीती भैंस अचानक डगमगा कर गिर रही थीं और गिरते ही मरने लगीं। लुवास के वैज्ञानिकों की टीम ने मंगलवार को पशुओं के ब्लड, सेल्स, चारे सहित कई जरूरी सैंपल लिए और पशुओं का इलाज शुरू किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतड़ियों में जख्म मिले थे।
डेयरी संचालक दीप सिहाग ने बताया कि मंगलवार उसके पास डेयरी में 110 पशु थे, जिनमें 30 गोवंश शामिल हैं। गोवंश में किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार चिकित्सकों ने स्थिति पर काफी हद तक काबू पाया है और केवल एक कटड़े की मौत हुई है। इसको मिलाकर उसके कुल 50 पशुओं की मौत हो चुकी है।
हमारी टीमें दिन-रात पशुओं के इलाज में जुटी हैं और इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। बुधवार सुबह एक कटड़े की मौत हुई, लेकिन बाकी बीमार 8 पशुओं की हालत स्थिर है। किसान को सरकार की स्कीम के तहत हर संभव सहायता दी जाएगी।
- डॉ. राजेंद्र वत्स, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग हिसार।
हमारी टीम के वैज्ञानिक दो दिन से देर रात तक लैब में काम कर रहे हैं और सैंपल की प्रोसेसिंग चल रही है। उम्मीद है कि हम वीरवार दोपहर तक स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे।
- डॉ. नरेश जिंदल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड, वेटरिनरी पब्लिक हैल्थ डिपार्टमेंट, लुवास।
खतरनाक होता है क्लोस्टिडियम कीटाणु
लुवास के वैज्ञानिकों ने बताया कि क्लोस्टिडियम एक खतरनाक कीटाणु होता है। जिसमें कई बार लक्षण दिखते हैं तो कई बार नहीं दिखते। यह कीटाणु पशु की अंतड़ियों को सूजा देता है और उनमें जख्म कर देता है, जिससे पशु पतला गोबर करता है या गोबर करना बंद कर देता है। इसके लक्षण सांस में दिक्कत व थकान भी हो सकती है। जब इसके लक्षण नहीं दिखते तो इसमें पशु की अचानक कुछ क्षण तड़पने के बाद मौत हो जाती है।
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