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सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे रेहड़ी चालक, मजदूर व किसान के बच्चों ने भी दसवीं की परीक्षा में हासिल की सफलता

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कसर पढ़ाई के मामले में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थियों के मुकाबले कमजोर माना जाता है। मगर इस बार सरकारी स्कूल के बच्चों ने बढ़िया अंक हासिल कर इस बात का झूठा साबित कर दिया है। यही नहीं ज्यादातर ये बच्चे ऐसे परिवारों से हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। इस तरह से इन बच्चों ने परिवार व स्कूल के स्तर पर जंग लड़कर यह सफलता हासिल की है। अमर उजाला टीम ने ऐसे ही कुछ बच्चों ने उनकी सफलता की कहानी साझा की।
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सरकारी स्कूल में पढ़कर हासिल किए 97 प्रतिशत अंक
गांव भोड़िया बिश्नोईयां स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल के छात्र निखिल ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। निखिल ने बताया कि वह कभी अंक लाने के लिए नहीं, नॉलेज के लिए पढ़ा। स्कूल से आकर वह दो से ढाई घंटे ही पढ़ता था, जिसमें वह अपने डाउट्स क्लीयर करता था। वह प्रतिदिन एक घंटे खेलता भी था। उसने परीक्षा के दौरान भी खेलना नहीं छोड़ा। वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी करता था। हालांकि परीक्षा के दौरान उसने सोशल मीडिया व मोबाइल से दूरी बनाकर रखी। निखिल ने बताया कि अब वह 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल संकाय चुनेगा। वह टीचर बनता चाहता है। निखिल के पिता महेंद्र सिंह गांव में एक दुकान चलाते हैं और मां भगवंती देवी एक गृहिणी हैं।
पिता लगाते हैं रेहड़ी, जुड़वा भाइयों ने हासिल किए 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन में पढ़ने वाले जुड़वा भाई अनुज व भानू ने दसवीं की परीक्षा में मेरिट प्राप्त की। अनुज ने 87 व भानू ने 82.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। न्यू मॉडल टाउन निवासी अनुज के मुताबिक उसके पिता प्रमोद राय रेहड़ी लगाते हैं। वह दोनों भाई रेहड़ी पर पिता का हाथ भी बंटाते थे और साथ में पढ़ाई भी करते थे। शाम के समय पहले एक भाई रेहड़ी पर जाता था, तब तक दूसरा घर पर पढ़ाई करता था। इसके बाद दूसरा रेहड़ी पर जाता था और पहले वाला घर आकर पढ़ाई करता था। अनुज के मुताबिक मेरा इंग्लिश मीडियम था और भानू के पास हिंदी मीडियम था।
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मजदूर की बेटी मीनाक्षी ने प्राप्त किए 92 प्रतिशत अंक
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुंडावास की छात्रा मीनाक्षी ने दसवीं की परीक्षा में 92.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। मीनाक्षी के पिता रोहताश मजदूरी करते हैं। मीनाक्षी ने बताया कि उसने टाइम टेबल बनाया हुआ था और उसी के अनुसार वह पढ़ाई करती थी। माइंड को रिफ्रेश करने के लिए थोड़ी देर छोटे भाई के साथ खेल लेती थी। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी। मीनाक्षी के मुताबिक वह टीचर बनना चाहती है। उसने 11वीं कक्षा में कला संकाय लिया है, जिसमें उसने मैथ लिया है, जो उसका फेवरेट सब्जेक्ट है।
पिता की है किराना की दुकान, बेटी ने हासिल किए 89 प्रतिशत अंक
गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल न्योली कलां की छात्रा नीरू ने परीक्षा में 89.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। नीरू के पिता महाबीर प्रसाद किराना की दुकान चलाते हैं। नीरू ने बताया कि वह रात 11 बजे तक पढ़ती थी और सुबह पांच बजे उठ जाती थी। सालभर में पांच से ज्यादा बार सिलेबस रिवाइज किया। अब 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में दाखिला लिया है। वह डॉक्टर बनना चाहती है।
किसान की बेटी ने हासिल किए 90 प्रतिशत अंक
गवर्नमेंट हाई स्कूल सुरेवाला की छात्रा पूजा ने परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पूजा के पिता हिम्मत सिंह एक किसान व मां सुशीला देवी एक गृहिणी हैं। पूजा ने बताया कि वह स्कूल से आने के बाद पढ़ने बैठ जाती थी। रात 11 बजे तक वह पढ़ती थी। बस बीच में खाना खाती थी और उसी दौरान टीवी देखती थी, जिससे माइंड फ्रेश हो जाता था। अब उसने 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल संकाय में दाखिला लिया है।
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