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गुजवि में प्रो. मलिक के खिलाफ तीन मामलों में चार्जशीट तैयार, एक का मांगा जवाब

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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में टीचिंग एसोसिएशन के चुनावों से ऐन पहले आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। विवि प्रशासन ने हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के पूर्व निदेशक प्रो. एनएस मलिक के खिलाफ तीन चार्जशीट तैयार कर दी है।
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विवि प्रशासन ने उन्हें एक मामले में चार्जशीट देकर जवाब भी मांग लिया है, जिनमें कोर्ट के आदेशों की अवहेलना, एचएसबी के पूर्व ट्रेनिंग ऐंड प्लेसमेंट ऑफिसर से मारपीट का आरोप और कार्यकारी परिषद के मुद्दों को बाहर भेजना शामिल है। विवि प्रशासन ने तीनों मामलों को लेकर प्रो. मलिक से जवाब मांगा है। वहीं, प्रो. एनएस मलिक के अनुसार चार्जशीट से संबंधित आज तक डॉक्यूमेंट नहीं दिखाया गया है और न ही कोई जवाब मांगा गया था। इस वक्त जो कार्रवाई की जा रही है, वो जानबूझकर की जा रही है।
इन तीन मामलों में तैयार की है चार्जशीट
विवि के एचएसबी में 11 अनुबंधित शिक्षकों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एचएसबी के तत्कालीन निदेशक प्रो. एनएस मलिक ने दोबारा ज्वाइन करवाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कुलपति के निर्देेशों के बाद भी उन्हें ज्वाइन नहीं करवाया गया। प्रो. मलिक का तर्क था कि उनके विभाग को इन शिक्षकों की जरूरत ही नहीं है। इनके आने से शिक्षक सरप्लस हो जाएंगे। वहीं, विवि प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा था कि इन्हें ज्वाइन करवाना अनिवार्य है।
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करीब दो वर्ष पहले एचएसबी के ट्रेनिंग ऐंड प्लेसमेंट ऑफिसर संजय सिंह ने तत्कालीन डायरेक्टर प्रो. मलिक पर आरोप लगाया कि उनके साथ उन्होंने मारपीट की है। इस मामले में संजय सिंह द्वारा शिकायत की गई थी। सूत्रों के अनुसार इसी मामले में उन्हें आरटीआई एक्टिविस्ट के साथ मिलकर विवि में आरटीआई लगाने के आरोप में चार्जशीट किया गया है। प्रो. मलिक कार्यकारी परिषद के सदस्य थे, तब उन पर परिषद की बैठक के मामलों को बाहर भेजने का आरोप है।
मुझे नहीं मिली चार्जशीट
मामले को लेकर प्रो. मलिक ने कहा कि मुझे कोई चार्जशीट नहीं मिली है। वैसे भी विवि प्रशासन कुछ लोगों के साथ मिलकर मेरे खिलाफ जो कुछ कर रहा है, वो इसलिए कर रहा है, क्योंकि मुझे सितंबर 2019 में गलत तरीके से निदेशक और डीन के पद से हटाया गया था। विवि प्रशासन अनुबंध न होने के बाद भी 11 अनुबंधित शिक्षकों को लगाना चाहता था। 29 में से 22 शिक्षकों को एक सप्ताह में 10 घंटे का वर्कलोड दे रखा है, जबकि यूजीसी और सरकार के रूल के अनुसार यह 14 से 16 घंटे प्रति सप्ताह होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसका नोटिफिकेशन यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2019 में ही निकाला था, लेकिन बेवजह अनुबंधित चहेतों को लगाने के लिए उन्हें हटा दिया गया। इन लोगों ने कोर्ट को भी गुमराह किया है। मैंने सारी डिटेल गवर्नर को भेज दी है। उम्मीद है दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
- प्रो. एनएस मलिक, पूर्व निदेशक, एचएसबी, गुजवि
कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर हमने तीन चार्जशीट तैयार की हैं। इनमें से एक चार्जशीट का जवाब भी प्रो. मलिक ने दे दिया है। तीनों मामलों में विवि में जिस तरह की घटनाएं हुईं, वो बेहद गलत थीं। ऐसा नहीं होना चाहिए था।
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- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुजवि
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