एक निजी अस्पताल में दाखिल दुर्घटना में घायल बच्ची की सूचना अस्पताल प्रबंधन द्वारा लिखित में पुलिस को न देने पर भड़के परिजनों ने नेशनल हाईवे पर तोशाम चुंगी के पास जाम लगा दिया और अस्पताल में जमकर तोड़फोड़ की। परिजन और कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण घायल बच्ची को भी गाड़ी में लिटाकर हाईवे पर ले आए। उन्होंने करीब तीन घंटे तक मार्ग को बाधित रखा।
इसके बाद मौके पर आई पुलिस ने किसी तरह आश्वासन देकर रास्ता खुलवाया। परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर आरोपी चालक का रिश्तेदार है, इसलिए वह इस मामले को दबाना चाहता है।
लोहारी राघो निवासी 7 वर्षीय अनु अपने मामा के यहां सोरखी में आई हुई थी। अनु के पिता रोहताश ने बताया कि सोमवार की शाम को जिस वक्त वह सड़क पार कर रही थी उसी दौरान एक तेज रफ्तार सफारी गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। पकड़े जाने पर गाड़ी चालक उसे हांसी के गर्ग अस्पताल ले आया। बच्ची के हाथ व पांव में फ्रेक्चर था। डॉक्टरों ने एक ओपीडी स्लिप पर बच्ची के दादा राजकुमार, अमरजीत, मामा पप्पू व सुबा के हस्ताक्षर करवाकर इलाज शुरू कर दिया।
डॉक्टर की परमानेंट मुहर, एक्सीडेंट नहीं गिरने से लगी चोट
डॉक्टर के आपरेशन करने के बाद जब बच्ची के परिजनों ने घायल का रुक्का पुलिस को भेजने को कहा तो डॉक्टर बिफर गए। डॉ. अतुल गर्ग ने कहा कि वे पुलिस को रुक्का नहीं भेजेंगे। उन्होंने एक ओपीडी स्लिप बच्ची के परिजनों को थमा दी जिस पर परिजनों के हस्ताक्षर थे तथा खाली जगह में बाद में डॉक्टर द्वारा एक मुहर लगाई गई थी जिसमें लिखा गया था कि मरीज को चोट गिरने के कारण लगी है तथा किसी का कोई कसूर नहीं है।
इसी मुद्दे पर पहले सोमवार की देर रात अस्पताल में हंगामा किया तथा मंगलवार की सुबह फिर से हंगामा हुआ। बच्ची के परिजनों का कहना था कि डॉक्टर ने उनकी बच्ची को पूरा इलाज दिए बगैर ही अस्पताल से निकाल दिया।
कई गांवों के ग्रामीणों ने काटा बवाल
भड़के परिजनों ने घायल बच्ची अनु को एक गाड़ी में लिटाया और इस गाड़ी को सुबह लगभग आठ बजे तोशाम चुंगी के नजदीक नेशनल हाईवे नंबर दस के बीचों बीच खड़ी कर दिया। प्रदर्शन कर रहे सोरखी, लोहारी, गढ़ी और सिसाय आदि गांवों के 150 लोगों ने बिजली के खंभे और पत्थर सड़क पर डालकर रोड जाम कर दिया। जाम करीब तीन घंटे तक रहा, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
सूचना मिलने पर सिटी थाना प्रभारी प्रतीक ढुल, सदर थाना प्रभारी जगबीर सिंह मौके पर पहुंचे लेकिन हालात काबू नहीं आए। गुस्साए परिजन गर्ग अस्पताल में घुस गए और अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू कर दी। उन्होंने अस्पताल के शीशे और सामान को तोड़ा। इसी दौरान वहां मौजूद डॉक्टरों ने अस्पताल के पीछे अपने रेजीडेंस में भागकर अपनी जान बचाई।
इस घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाकर अस्पताल पर तैनात किया गया। बाद में एएसपी मनोज कुमार भी पहुंचे तथा उन्होंने प्रदर्शनकारियों को मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन देते हुए जाम खोलने के लिए राजी कर लिया।
डॉक्टरों ने बुलाई आपात बैठक
गर्ग अस्पताल में तोड़फोड़ के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक आपात बैठक बुलाई। डॉ. टीआर गर्ग के घर बुलाई गई इस बैठक में डॉ. टीआर गर्ग ने कहा कि डॉक्टरों को तमाम अस्पताल फौरन बंद कर देने चाहिए। तमाम डॉक्टरों ने इस घटना पर रोष प्रकट करते हुए पुलिस से कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की। डॉ. टीआर गर्ग ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उनके अस्पताल में गलत तरीके से घुसकर तोड़फोड़ की गई है, जबकि उनके बेटे अतुल गर्ग ने कहा कि वे सलाह करने के बाद ही कोई बयान देंगे।
दोनों ओर से नहीं मिली है कोई शिकायत : पुलिस
सिटी थाना प्रभारी प्रतीक ढुल ने कहा है कि दोनों पक्षों की ओर से ही कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया जाएगा।