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अल नीनो का असर: हरियाणा के कई जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों की चिंता बढ़ी; इन जिलों में शून्य बारिश दर्ज

Fri, 10 Jul 2026 10:16 AM IST
Naveen माई सिटी रिपोर्टर, हिसार (हरियाणा)

सार

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण अधिक बारिश होती है। लेकिन इस बार जीटी बेल्ट और अरावली क्षेत्र से लगते जिलों में ज्यादा बारिश हो रही है। यह असमान वितरण किसानों और आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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मौसम (सांकेतिक) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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प्रदेश में मानसून का पैटर्न बदल गया है। अल नीनो के प्रभाव और कम दबाव के क्षेत्र कम बनने से यह बदलाव आया है। वीरवार को लगातार चौथे दिन करनाल, भिवानी, दादरी, गुरुग्राम, पलवल और यमुनानगर में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि, हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में बादलों ने निराश किया। इन जिलों में छिटपुट बारिश के बाद उमस का स्तर बढ़ गया। मानसून के पहले 9 दिनों में इन जिलों में सूखे जैसे हालात रहे हैं।

वीरवार शाम पांच बजे तक करनाल में 68 एमएम, चरखी-दादरी में 45 एमएम, भिवानी में 34 एमएम, यमुनानगर में 44.5 एमएम, पलवल में 23.5 एमएम और कैथल में 18 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, हिसार, सिरसा और फतेहाबाद में शून्य बारिश दर्ज की गई।

मानसून की कमजोर स्थिति

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मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस बार मानसून कमजोर साबित हो रहा है। इस वर्ष एक समान बारिश का पैटर्न नहीं दिखाई देगा। अल नीनो के प्रभाव के कारण कुछ हिस्सों में कम बारिश हो रही है। कम दबाव का क्षेत्र बनने से टर्फ में बदलाव हो रहा है। इस वजह से कुछ जिलों में अत्यधिक बारिश हो रही है, जबकि कुछ में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं।

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव
जेट धाराएं दक्षिणी नहीं होने से पश्चिमी विक्षोभ भी असरकारी साबित नहीं हो पा रहे हैं। आमतौर पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण अधिक बारिश होती है। लेकिन इस बार जीटी बेल्ट और अरावली क्षेत्र से लगते जिलों में ज्यादा बारिश हो रही है। यह असमान वितरण किसानों और आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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