सेक्टर 33 में बने हुए अवैध बाड़े को दिखाते सुरेंद्र वर्मा।
हिसार। नगर निगम की पशु पकड़ने वाली टीम को अभियान के दौरान सेक्टर 33 में सरकारी जमीन पर एक अवैध पशु बाड़ा मिला। निगम ने मौके से काफी संख्या में पशुओं को पकड़कर गोअभयारण्य पहुंचाया।
निगम की टीम को सूचना मिली कि सेक्टर 33 में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर अवैध पशु बाड़ा बना रखा है। इस पर टीम मौके पर पहुंची तो देखा कि यह बाड़ा घनी झाड़ियों के बीच में बना रखा है। हालांकि टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही पशु बाड़ा मालिक को भनक लग गई और उसने पशुओं को बाड़े से भगा दिया। फिर भी कुछ पशु इधर-उधर घूमते मिले। टीम ने इन पशुओं को पकड़ लिया। इससे पहले भी सेक्टर 33 में अवैध पशु बाड़े मिल चुके हैं और उस समय पर इन पर कार्रवाई की गई थी।
दिनभर में पकड़े 41 पशु
नगर की टीम ने दिनभर में 41 पशुओं को पकड़कर गोअभयारण्य भिजवाया। इस दौरान सेक्टर 33 के अलावा सेक्टर 14, बस स्टैंड के सामने, ऋषि नगर, ग्रोवर मार्केट, मिलगेट, कौशिक नगर के आसपास के क्षेत्र से पशु पकड़े गए। अतिरिक्त निगमायुक्त डॉ. प्रदीप हुड्डा ने कहा कि इस अभियान के दौरान अगर कोई क्षेत्रवासी या पशुपालक बाधा उत्पन्न करेगा तो पशु क्रूरता सहित अन्य धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर अभियान के नोडल ऑफिसर सुरेंद्र वर्मा, तहबाजारी इंचार्ज सुरेंद्र शर्मा, एएसआई संदीप सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान बोले - इन कारणों से शहर नहीं हो रहा पशु मुक्त
उधर पशु डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान नंदलाल पाहवा का कहना है कि कई कारणों की वजह से शहर पशु मुक्त नहीं हो रहा है। इन कारणों में पशु मंडियों का बंद होना, शहर में पशुपालकों के लिए स्थान की कमी, नकली व मिलावटी दूध का बिना व दूध का रेट कम होना, गांवों में गोचरण पर अवैध कब्जे होना व पशुपालकों पर सख्ती करना शामिल है। इसके लिए जरूरी है कि सरकार पशु मंडियों को फिर से शुरू करे। पशु डेयरियों को शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाए। नकली दूध बंद किया जाए। इससे शुद्ध दूध के रेट बढ़ जाएंगे। ऐसे में कम दूध देने वाले पशु की भी कीमत बढ़ जाएगी और वे सड़कों पर दिखाई नहीं देंगे। गांवों में गोचरण भूमि से कब्जे हटाए जाए ताकि गांवों में पशुपालकों पर आर्थिक बोझ कम हो। इसके अलावा पशुपालकों पर सख्ती करने से कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सड़कों पर घूमने वालों में ज्यादातर नंदी व बूढ़ी गाय हैं।