हिसार। घर में बेटी के जन्म की खुशियां मनाने के लिए लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे थे। दादा-दादी दोनों ही पोती के जन्म को उत्सव की तरह मनाना चाहते थे। कोरोना ने ऐसा ग्रहण लगा कि हंसते-खेलते इन परिवार की तमाम खुशियां क्षण भर में मातम में बदल गई। पांच दिनों के अंदर दादा सुरेंद्र कामरा, दादी नवीन कामरा दुनिया से अलविदा कह गए।
2 मई को सुरेंद्र की खांसी बुखार होने के कारण हालत बिगड़ गई। शहर के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां कोरोना से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई। 12 मई को सुरेंद्र कामरा की हालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल में ले गए। 13 मई को कोरोना से उनकी मौत हो गई, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। उनकी पत्नी नवीन कामरा की भी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें भी शहर के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया, जहां से उनकी भी कोरोना से ग्रस्त होने की पुष्टि हुई। 18 मई को नवीन कामरा ने भी दम तोड़ दिया। 28 वर्षीय अनीश कुमार और दो बेटियां के सिर से महज पांच दिन में माता-पिता का साया उठ गया। अनीश कुमार के परिवार में भी हाल ही में एक बेटी ने जन्म लिया है। स्थिति को देखते हुए फिलहाल सभी होम आइसोलेट हैं।
पिता और भाई रह चुके हैं सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान
मृतक सुरेंद्र के बड़े भाई रविंद्र कुमार कामरा ने बताया कि उनके पिता हरबंस कामरा 20 सालों तक सब्जी मंडी एसोसिएशन के प्रधान रहे। पिता की मौत के बाद तीसरे नंबर के भाई सोहनलाल कामरा को सब्जी मंडी एसोसिएशन का प्रधान चुना गया। 25 साल तक लगातार वे प्रधान पद पर कार्यरत रहे। 2 साल पहले उनकी मौत हो गई थी ।
कई सालों से एक ही छत के नीचे रह रही हैं 4 पीढ़ियां
मुल्तानी चौक निवासी रविंद्र कुमार कामरा ने बताया कि कई सालों से चार पीढ़ियां एक ही छत के नीचे रह रही हैं। चारों भाइयों में वह सबसे बड़े हैं। दूसरे नंबर के भाई मोहनलाल कामरा, तीसरे नंबर के भाई सोहनलाल कामरा, सबसे छोटे भाई सुरेंद्र कुमार कामरा थे। (संवाद)