चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की कीटनाशक अवशेष प्रयोगशाला को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड केलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) की मान्यता मिल गई है। अब इस प्रयोगशाला में खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेषों के लिए जांच की रिपोर्ट विश्व स्तर पर मान्य होगी।
एनएबीएल की ओर से उपरोक्त लेबोरेट्री को जारी किए गए एक्रीडिटेशन सर्टिफिकेट का वीरवार को कुलपति प्रो. केपी सिंह ने लेबोरेट्री में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के बीच अनावरण किया। हरियाणा का यह पहला विश्वविद्यालय है जिसको खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की जांच के लिए एनएबीएल की मान्यता प्राप्त हुई है। विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग में, जहां ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन पेस्टीसाइड रेजिड्यू के अंतर्गत उपरोक्त कीटनाशक अवशेष प्रयोगशाला स्थापित है, के प्रमुख वैज्ञानिकों डॉ. बीना कुमार तथा डॉ. सुशील अहलावत के अनुसार इस प्रयोगशाला में सब्जियों, फलों, जल तथा अनाज में कीटनाशी अवशेषों की जांच हो सकेगी जिसकी रिपोर्ट देश-विदेश में मान्य होगी। उन्होंने बताया कि इस प्रयोगशाला का किसानों तथा कृषि उत्पाद निर्यातकों को लाभ होगा। विदेशों में निर्यातकों को किसी भी उत्पाद की दोबारा जांच नहीं करवानी पड़ेगी।
दो बार किया दौरा
कीट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आर.एस. जागलान ने बताया कि उपरोक्त प्रयोगशाला को मान्यता प्रदान करने से पूर्व इसमें उपलब्ध सुविधाओं का आंकलन करने के लिए एन ए बी एल की टीम ने दो बार दौरा किया। उन्होंने बताया कि इस टीम ने इस प्रयोगशाला को अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा पाया तथा मान्यता प्रदान की।
कुलपति ने किया प्रयोगशाला का अवलोकन
कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने एक्रीडिटेशन सर्टिफिकेट का अनावरण करने से पूर्व उपरोक्त प्रयोगशाला में जांच उपकरणों तथा सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा यह प्रयोगशाला देश ही नहीं अपितु एशिया में श्रेष्ठ होने का दम रखती है। उन्होंने इस प्रयोगशाला में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों तथा रिसर्च एसोसिएट डॉ. रीना और डॉ. सुषमा की प्रशंसा की। इस अवसर पर एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन डॉ. आर.के. पान्नू भी उपस्थित थे।