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कृषि मेले में 45 हजार किसानों ने की 8 लाख रुपये के बीजों की खरीदारी

Fri, 24 Mar 2017 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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HU hisar - फोटो : Bureau
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एचएयू के दो दिवसीय कृषि मेले में 7 लाख 55 हजार रुपये की खरीफ फसलों और सब्जियों की उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज एवं बॉयोफर्टिलाइजर की बिक्री हुई। मेले में करीब 45 हजार किसानों ने शिरकत की। किसानों ने 37 हजार रुपये के पौधों की नर्सरी भी खरीदी। खरीफ फसलों व सब्जियों के बीज तथा फलों की नर्सरी उपलब्ध करवाने के लिए विवि ने मेला स्थल पर सरकारी बीज एजेंसियों के सहयोग से बीज बिक्री की व्यवस्था की थी। मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों से भी भारी संख्या में किसान शामिल हुए।
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65 हजार की कृषि संबंधित किताबें बिकी
मेले में आए किसानों ने 65 हजार रुपये का कृषि साहित्य भी खरीदा। मेले में स्टॉल लगाकर कृषि संबंधित किताबें बेची गई। जिनको खरीदने में किसानों ने काफी रुचि दिखाई। कृषि पैदावार एवं कृषि मशीनीकरण के बारे में किताबों में विस्तार से बताया गया था।

250 से अधिक स्टॉल लगाए गए
प्रदर्शनी में 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर विश्वविद्यालय तथा गैरसरकारी एजेसियों व मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा भी कृषि प्रौद्योगिकी, बीज, कीटनाशी दवाएं आदि प्रदर्शित किए गए थे।
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30 प्रगतिशील किसानों को किया गया समानित
मेले में 30 प्रगतिशील किसानों तथा कृषक महिलाओं को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कृषि औद्योगिक प्रदर्शनी में लगाई गई स्टॉलों में बीज श्रेणी में शक्तिवर्धक हाईब्रिड, कीटनाशक श्रेणी में क्रिस्टल क्रॉप प्रोटैक्शन, उर्वरक श्रेणी में एम डी बॉयोकोल तथा मशीनरी एवं ट्रैक्टर श्रेणी में साधु एग्रो इंडस्ट्री को प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए। इसी प्रकार मिश्रित श्रेणी में फॉलकन ग्रुप, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग तथा अन्य विश्वविद्यालय श्रेणी में लुवास को प्रथम पुरस्कार दिए गए।

 डायबिटीज रोगी लाल और बैंगनी रंग के आलू का करें सेवन
कृषि मेले में लाल ओर बैंगनी रंग के आलू विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कृषि वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि लाल ओर बैंगनी रंग के आलू पहाड़ी इलाकों में होते है। एचएयू द्वारा इन पर रिसर्च की जा रही है। रिसर्च के बाद इन आलूओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर एचएयू में भी इनकी खेती की जाएगी। इन आलूओं में सामान्य आलूओं के मुकाबले शर्करा की मात्रा भी कम होती है। जिस कारण डायबिटीज के रोगियों के लिए भी काफी उपयोगी आलूू साबित होते है। शिमला, सोलन में लाल व बैंगनी रंग के आलू की अधिकतर खेती की जाती है। कृषि मेले में आलू की करीब 25 किस्में देखने को मिली। इनमें कुफरी सिंदूरी, कुफरी बादशाह, कुफरी चिप्सो, कुफरी सूर्या, कुफरी मोहन, कुफरी पुष्कर, पी-30 आदि चीजें रही।

2 मिनट में तैयार करे हलवा और दलिया
मेले में एचएयू के द्वारा लगाई गई स्टॉलों मे 2 मिनट में हलवा तैयार करने की विधि भी बताई गई। कृषि वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच साल से सूजी, बाजरे पर रिसर्च करके दो मिनट में हलवा व दलिया बनाने की प्रक्रिया तैयार की है। दो मिनट में हलवा तैयार करने के लिए सूजी, बाजरे को पहले एंजाइम टेस्ट प्रक्रिया में डाला जाता है। एंजाइम टेस्ट में इन चीजों को खराब करने वाले एंजाइम नष्ट कर दिये जाते है। इससे दो-तीन दिन में खराब होने वाले बाजरे, सूजी व गेहूं से बनी चीजें तीन महीने तक भी सुरक्षित रह सकती है। एंजाइम टेस्ट के बाद हलवा बनाने के लिए सूजी व बाजरे के मिश्रण को सेंका जाता है। तथा बाद में इसकी पेकिंग कर दी जाती है। इस मिश्रण को पानी डालकर दो मिनट के लिए गर्म किया जाता है। जिससे सिर्फ दो मिनट के अंदर ही हलवा तैयार हो जाता है।
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