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Hisar News: मछलियों के लिए कैसा है पानी, मौके पर ही होगी जांच

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हिसार। मछली पालकों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें मछली पालन के लिए तालाब के पानी की जांच करवाने के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़ेगा। उनके जिले में मौके पर मोबाइल लेबोरेटरी वैन पहुंचेंगी और पानी के सेंपल की जांच कर तुरंत रिपोर्ट देगी। इसके लिए प्रदेश में तीन मोबाइल लेबोरेटरी वैन मिलेगी। एक मोबाइल वैन तो इसी वित्तीय वर्ष में पहुंच जाएगी।
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इस वैन में पीएच, घुलनशील ऑक्सीजन, तापमान, घुलनशील ठोस, अमोनिया, नाइट्रेट जैसे पैरामीटर होंगे जो पानी की जांच करेंगे। जोकि मछली के जीवित रहने से लेकर अच्छी ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस वैन में एक लैब अटेंडेंट, एक हेल्पर और एक ड्राइवर होगा। इस दौरान मछली पालकों को जागरूक भी किया जाएगा। 2024-25 में जिले में मछली का 12,954 टन उत्पादन हुआ था।
जिला मत्स्य अधिकारी भीमसैन का कहना है कि अभी पानी जांच के लिए हिसार और रोहतक में ही सुविधा है। हिसार के मत्स्य विभाग में एआरटीआई (एक्वा कल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) बना है। इसमें मछली के पानी की जांच होती है। रिपोर्ट आने में एक से दो दिन का समय लग जाता है। मगर अब मोबाइल लेबोरेटरी वैन मौके पर ही पानी की जांच कर मछली पालकों को रिपोर्ट देगी।
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वहीं, मछली के पानी में अमोनिया की मात्रा 0.25 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से ऊपर नहीं होनी चाहिए। यदि इससे ऊपर होता है तो मछली के लिए घातक हो सकता है। पानी की जांच करवाने के लिए विभाग की ओर से एक नंबर जारी किया जाएगा। दिन फिक्स किए जाएंगे कि किस दिन किस जिले में मोबाइल लेबोरेटरी वैन जाएगी ताकि किसानों को पानी की जांच करवाने में परेशानी न हो।

अभी सैंपल के लिए जा रहे 10 रुपये
अभी पानी की जांच करवाने के लिए मछली पालकों से 10 रुपये लिए जा रहे हैं। जब मोबाइल लेबोरेटरी वैन से पानी की जांच की जाएगी तो इससे शुल्क थोड़ा बढ़ जाएगा। हालांकि अभी फाइनल नहीं हुआ है तो कितने रुपये लगेंगे। मोबाइल लेबोरेटरी वैन का उद्धाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी से करवाने की बात कही जा रही है।
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अमोनिया की मात्रा ज्यादा हुई तो मर सकती हैं मछलियां यदि पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा हुई तो मछली की स्किन के ऊपर तेलीय त्वचा झरने लगती है। मछलियों में रोग-प्रतिरोध की क्षमता कम हो जाती है। इससे उनमें इंफेक्शन बढ़ जाता है। उनके शरीर में अमोनिया जमा हो जाता है और उनके गिल काम नहीं कर पाते है। यहां तक कि मछली मर तक जाती है।

मछली पालकों के लिए मोबाइल लेबोरेटरी वैन कारगर साबित होगी। पानी की जांच करने के बाद उन्हें मौके पर ही रिपोर्ट मिल सकेगी। इससे मछली पालकों को काफी फायदा मिलेगा।
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- संदीप कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर कम प्रिंसिपल, एक्वा कल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट।
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