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मेरा पेट खराब है, न्यू कहंवै काल आइयो, काल तक के पेट पकड़ कै बैठी रहूं...

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ागरिक अस्पताल में अपनी मागों को लेकर धरने के दौरान नारेबाजी करते चिकित्सक। - फोटो : Hisar
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दो भीने पहल्यां मेरी आंख्या का प्रेशन होया था। डॉक्टर तै कई बै दिखाण आ ली। आज भी बुलाई थी। सबेरे तै बैठी हूं, कोए डॉक्टर ना आया। इब बेरा पाट्या वे तै हड़ताल कर रे सैं। ईब बाट देखूं हूं के डॉक्टर आज्यां तै दिखा कै दवाई ले ल्यूंगी। मेरे तै रोज-रोज के आया जावै है बेटा। यह कहना था बिचपड़ी गांव से आई 65 वर्षीय भरपाई देवी का।
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अपनी मांगों को लेकर नागरिक अस्पताल के डॉक्टर वीरवार को हड़ताल पर रहे। इसके चलते अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी के लिए आने वाले करीब 1500 मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी व पोस्टमार्टम सेवाएं सुचारु रहीं, लेकिन अस्पताल के लगभग सभी 27 डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी में आए मरीज दिनभर भटकते रहे। काफी मरीज दोपहर बाद तक डॉक्टरों के लौटने का इंतजार करते रहे, लेकिन जब डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त नहीं की तो मरीज वापस जाने शुरू हो गए। दूसरी ओर जिलेभर के 97 डॉक्टरों ने सिविल सर्जन कार्यालय के सामने धरना दिया और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। डॉक्टर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान कामिद मोंगा ने बताया कि हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसिज एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा 21 जुलाई को करनाल में मीटिंग की गई थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा आश्वासन दिए जाने के 15 दिनों के बाद भी उनकी मांगों को नहीं माना गया है। इसके विरोध में डॉक्टरों ने 30 अगस्त को दो घंटे के लिए कलम छोड़ हड़ताल की थी और पूरे दिन काले बिल्ले लगाकर सरकार के प्रति विरोध जताया था। अब हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसिज एसोसिएशन सरकार के इस रवैये से बेहद निराश है, जिसके चलते यह एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की गई है।
स्पेशलिस्ट डॉक्टर का दर्जा देने की मांग
जिला प्रधान डॉ. कामिद मोंगा व उप प्रधान डॉ. अजीत लाठर की अध्यक्षता में दिए धरने को संयुक्त सचिव डॉ. समीर कंबोज, खजांची डॉ. विक्रम, डॉ. शमशेर सिंह, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई, डॉ. रमेश कामरा, डॉ. मनीष, डॉ. सुनील कौशिक ने भी संबोधित किया। उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले एसीपी के तहत मिलने वाली स्कीम पांच साल की जगह चार साल में देने और पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर को स्पेशलिस्ट डॉक्टर का दर्जा दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं।
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हड़ताल से परेशान मरीज बोले
मुझे जोड़ों का दर्द है। इस वजह से सुबह जल्दी अस्पताल आई थी कि डॉक्टर को दिखाकर समय से घर चली जाऊंगी, लेकिन डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिस कारण चेकअप नहीं हो सका। अब कल फिर आना पड़ेगा।
- कमला देवी, रामपुरा मोहल्ला निवासी
मैं अपने पिता कांशीराम को एलर्जी वाले डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह ही आ गया था। डॉक्टर तो हड़ताल पर बैठे हैं, जिस कारण मेरे पिता का चेकअप नहीं हो सका। चार घंटे इंतजार कर रहा हूं कि हड़ताल खत्म हो तो आज ही पिता को दिखा दूं, नहीं तो कल फिर आना पड़ेगा।
- उमेद, देव मुकलान गांव।
मैं अपनी आंखें चेक करवाने के लिए सुबह ही घर से आई थी, लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि आज सभी डॉक्टर हड़ताल पर बैठे हैं, जिस कारण आज आंखों का चेकअप नहीं हो सका।
- रामरसी, खैरी गांव निवासी
मेरी आंखों का ऑपरेशन दो महीने पहले ही हुुआ है। आज डॉक्टर को आंखें चेक करवानी थीं, लेकिन यहां डॉक्टरों की हड़ताल के कारण चेकअप नहीं हो सका। कई घंटे के इंतजार के बाद अब पता चला कि अब कल ही चेकअप होगा।
- मैना देवी, कालोद बुड्ढा गांव निवासी
बेटा मेरै पेट म्है दर्द था। यो मेरा छोरा दिखाण खातर ल्याया था। उरै बैठे कई घंटे तो हो लिए पर कोए डॉक्टर न्हीं मिल्या। सबेरे ही आ गे थे। 5-6 घंटे हो लिए, ईब कहवै है काल आइयो। काल तक के पेट पकड़े बैठी रहूं।
- भानी देवी, छानी गांव निवासी
मैं अपने बच्चे का डॉक्टर से चेकअप करवाने के लिए आई थी। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण आज तो चेकअप हो नहीं सका, इसलिए कल दोबारा आना पड़ेगा।
- ललिता, धोलकोट गांव निवासी
नहीं बन पाया मेडिकल
मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने आए डोबी गांव निवासी संदीप, जेवरा निवासी मनोज, उकलाना निवासी बलदेव, तालू निवासी पवन ने बताया कि उन्होंने पटवारी पद के लिए फार्म भरे थे। उसके लिए उन्हें मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने हैं। वे सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सुबह ही अस्पताल आ गए थे, लेकिन यहां आकर पता चला डॉक्टर हड़ताल पर हैं। दो घंटे से इंतजार कर रहे हैं कि हड़ताल खत्म हो जाए। अब लगता है कि वापस जाना पड़ेगा और कल ही आना होगा।
वीरवार को हुई हड़ताल के बावजूद सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती तो नौ सितंबर को पूर्ण हड़ताल की जाएगी, जिसमें ओपीडी से लेकर पोस्टमार्टम सेवाएं सभी बंद कर दी जाएंगी। इस दिन केवल इमरजेंसी सेवाएं ही दी जाएंगी।
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- डॉ. कामिद मोंगा, जिला प्रधान, सिविल मेडिकल सर्विसिज एसोसिएशन, हरियाणा।
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