हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (एचएयू) के कैंपस में स्थित सेंटर फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी (सीपीबी) अब एचएयू का ही एक हिस्सा बन गया है। अभी हाल ही में हुई प्रदेश सरकार की कैबिनेट की मीटिंग में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। अभी तक यह सेंटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के अधीन था।
बता दें कि इस सेंटर में काफी समय से कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई थी। सेंटर के शुरू होने पर जो स्टाफ यह तैनात किया गया था, उनमें से ज्यादातर कर्मचारी अन्य विभागों में चले गए। कर्मचारियों की कमी के कारण सेंटर में करोड़ों रुपये की मशीनों का इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा था। यह देखते हुए साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के मुख्य सचिव अशोक खेमका ने इसे एचएयू में ही मर्ज करना मुनासिब समझा।
वर्ष 2000 में बना था सीपीबी
केंद्र सरकार के फंड से वर्ष 2000 में सेंटर फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन इन प्लांट टिश्यू कल्चर स्थापित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2005 में इसे प्रदेश सरकार ने अपने अधीन ले लिया और इसका नाम बदलकर सेंटर फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी कर दिया गया। वर्ष 2007 में इसके रिसर्च स्कोप व दायित्वों को बढ़ा दिया गया।
यह कार्य होता है सेंटर में
इस सेंटर का कार्य टिश्यू कल्चर तकनीक की मदद से पौधे तैयार कर उन्हें किसानों को उपलब्ध कराना है। यह सेंटर किसानों की डिमांड के अनुरूप ही पौधे तैयार करता है। टिश्यू कल्चर तकनीक में पौधे के किसी भाग से सेल्स लेकर उसकी मदद से लैब में पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें ग्रीन हाउस में उन्हें विकसित किया जाता है। हालांकि यह सेंटर बायोटेक्नोलॉजी विषय में विद्यार्थियों को ट्रेनिंग भी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा सेंटर में एचएयू की मदद से मास्टर और पीएचडी कोर्स भी संचालित किए जाते हैं।
वर्तमान में यह है कर्मचारियों की स्थिति
फिलहाल यहां एक साइंटिस्ट व चार तकनीकी सहायक तैनात है। इसके अलावा डेपुटेशन पर एचएयू के एक वैज्ञानिक यहां बतौर डायरेक्टर तैनात हैं। हालांकि यह साइंटिस्ट व तकनीकी सहायकों की करीब 14 पोस्ट स्वीकृत है। अब इस सेंटर के एचएयू में मर्ज होने से यह सभी कर्मचारी एचएयू के कर्मचारी बन गए हैं। हालांकि विभाग ने इन्हें इस बात से छूट प्रदान की है कि अगर कोई कर्मचारी एचएयू में नहीं जाना चाहता है तो वह साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग में ही रह सकता है।
यह होगा फायदा
इस सेंटर में बायोटेक्नोलॉजी की आधुनिक लैब बनी हुई हैं, जिनमें करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें रखी हैं। मगर वैज्ञानिक व तकनीकी सहायकों की ज्यादातर पोस्ट खाली होने से इन लैब का पूरे ढंग से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। अब एचएयू के अंडर आने से यहां और स्टाफ तैनात किया जा सकेगा, जिससे टिश्यू कल्चर से संबंधित ज्यादा रिसर्च वर्क यहां हो सकेगा और उनका लाभ किसानों को भी मिलेगा।
कैबिनेट की मीटिंग में इस प्रस्ताव पर मंजूरी मिल गई है। इसके साथ यह सेंटर एचएयू का हिस्सा बन गया बहै।
रोहताश, तकनीकी सहायक, सीपीबी।