पिता की मौत के सदमे से उभर कर हॉकी खिलाड़ी उदिता ने वो मुकाम हासिल किया है। जो इतनी कम उम्र में शायद ही कोई लड़की कर पाती है। हाल ही में भारतीय जूनियर हॉकी टीम की कप्तान चुनी गई उदिता हिसार के पुलिस लाइन एरिया निवासी है। उदिता के नेतृत्व में जूनियर हॉकी टीम ने छठवें एशिया कप में ब्रांज मेडल हासिल किया था। उदिता के नेतृत्व में भारतीय जूनियर हॉकी टीम को 5 में से 4 इंटरनेशनल मैचों में जीत मिली है।
लड़कियों को हॉकी खेल देख हुई प्रेरित
उदिता ने बताया कि वह अपने घर के पास लड़कियों को हॉकी खेलते देख प्रेरित हुई। लड़कियों को हॉकी खेलते देख उसके मन में आया कि वह भी हॉकी खेल सकती है। उसने यह इच्छा अपनी मां को जाहिर की। जिसके बाद मां के कहने पर पुलिस लाइन में ही हॉकी कोच बलराज सिंह सोढी से ही हॉकी का प्रशिक्षण लेना आरंभ किया। कुछ समय पश्चात उदिता ने साईं सेंटर में हॉकी का प्रशिक्षण लेना आरंभ किया।
मां की लगन से मिली कामयाबी
उदिता ने बताया कि उसको खेल में कामयाबी दिलाने में उसकी माता की अहम भूमिका रही है। जब वो 17 साल की थी। तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। उसके पिता पुलिस में कार्यरत थे। पिता की मौत के बाद भी उसकी माता ने हिम्मत से काम लेते हुए जिंदगी में हर मोर्चे पर उसका साथ दिया।
खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी
उदिता खेल के साथ पढ़ाई भी कर रही है। उदिता ने दसवीं कक्षा में अच्छे अंक हासिल किये हैं। फिलहाल वह भारतीय टीम की कप्तानी के साथ शहर के एक निजी स्कूल से 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर भी कर रही है।
सीनियर टीम की कप्तान बनने की भी है ख्वाहिश
उदिता ने बताया कि वह भारतीय टीम को बुलंदियों पर लेकर जाना चाहती हैं तथा सीनियर टीम की भी कप्तानी करना चाहती हैं। इसके लिये जी तोड़ मेहनत भी कर रही हैं।
महज आठ साल के कॅरियर में पाई भारतीय टीम की कप्तानी
उदिता ने 2008 में हॉकी खेलना आरंभ किया था। इससे पहले अंडर 14 व अंडर 17 में भी जूनियर टीमों की कप्तानी कर चुकी हैं। इतने कम समय में ही उसने अपनी मेहनत के बल पर भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी पाई है।