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कुलदीप विश्नोई की नौ साल बाद घर वापसी, हजकां का कांग्रेस में होगा विलय

Mon, 25 Apr 2016 11:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
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कुलदीप, रेणुका विश्नोई, राहुल गांधी - फोटो : Bureau
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पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से गठजोड़ नहीं होने के बाद लगभग हाशिए पर चली गई हजकां कांग्रेस से नाता जोड़ती है तो यह कांग्रेसी विचारधारा के नेताओं का एकजुट होना तो कहा ही जाएगा, कांग्रेस रहित भारत का सपना देख रही भाजपा को प्रदेश में झटका लगना स्वाभाविक है। हाल ही में प्रदेश की भाजपा सरकार ने तीन नए जिलों के प्रस्ताव का एलान कर कांग्रेस, इनेलो और हजकां के गढ़ में सेंध लगाने का प्रयास किया है, क्योंकि गोहाना, हांसी व दादरी तीनों क्षेत्रों में भाजपा नहीं है। लेकिन हजकां और कांग्रेस के विलय ने नए समीकरण बनने के संकेत दिए हैं।
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प्रदेश कांग्रेस नेता स्वागत की मुद्रा में
गुटबाजी में उलझी कांग्रेस हजकां के कांग्रेस में विलय पर स्वागत की मुद्रा में हैं, क्योंकि गैर जाटों के एक छत्र नेता भजनलाल के दम पर प्रदेश में राज कर चुकी कांग्रेस यह उम्मीद कर सकती है कि हजकां के जरिए पंजाबी बिरादरी और गैर जाट वर्ग उसके साथ आ सकता है।

हजकां का वजूद खतरे में था
वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद भजनलाल परिवार कांग्रेस की राजनीति में हाशिये पर चला गया था, जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़कर दिसंबर 2007 में हजकां का गठन किया। आज भजनलाल की गैरमौजूदगी के बीच कुलदीप बिश्नोई के नेतृत्व में हजकां के लगातार दो विधानसभा व दो संसदीय चुनावों में प्रभावशाली प्रदर्शन न कर पाने के कारण उनका खुद का राजनीतिक वजूद खतरे में है। ऐसे में अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए कुलदीप बिश्नोई के सामने अपने दल हजकां का किसी अन्य दल में विलय करने का ही रास्ता बचा था।
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हुड्डा को सीएम बनाने पर टूटा था साथ
वर्ष 2005 का विधानसभा चुनाव चौ. भजनलाल के नेतृत्व में लड़ा गया था। कांग्रेस ने 67 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया और भजनलाल के बजाय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पार्टी विधायक दल का नेता बनाकर राज्य की कमान सौंप दी। इसके बाद से भजनलाल कांग्रेस से खफा थे। इसके बाद 2 दिसंबर, 2007 में रोहतक में बड़ी रैली करके भजनलाल व उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस छोड़ने का एलान कर दिया। इसी दिन हजकां (बीएल) का गठन भी किया गया।

हरियाणा में कांग्रेस को भी गैर जाट चेहरे की तलाश है और इसलिए पार्टी एचजेसी के साथ विलय को लेकर गंभीरता दिखा रही है. एचजेसी को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल ने खड़ा किया था. लोकसभा में इस पार्टी की कोई सीट नहीं है, जबकि? 90 विधायकों वाली विधानसभा में पार्टी के दो एमएलए हैं. एचजेसी ने पहले बीजेपी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन बाद में यह टूट गया

कुलदीप बिश्रोई ही बेहतर बता सकते हैं कि ऐसी पार्टी में वो क्यों शामिल हुए जो इस समय अपने न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है। संसद में जिस पार्टी के महज 44 सांसद हों, उस पार्टी में शामिल होकर कुलदीप बिश्रोई क्या तीर मारेंगे, ये तो वो ही बेहतर बता सकते हैं। कुलदीप के कांग्रेस में जाने से कांग्रेस में गुटबाजी बढ़ेगी, लेकिन भाजपा या प्रदेश सरकार को कोई खतरा नहीं है। नगर निकाय चुनावों पर नए राजनीतिक समीकरणों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
सुभाष बराला, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा

पार्टी भले ही अलग थी,लेकिन कांग्रेस से दिल से दूर नहीं थे। पार्टी में वापस लौटकर रिलीफ महसूस हो रहा है। पुरानी बातें सभी याद हैं, लेकिन अब सभी मिलकर कांग्रेस को मजबूत करेंगे।
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-कुलदीप बिश्नोई, अध्यक्ष हजकां
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