सामान्य से छह डिग्री ज्यादा दर्ज किए गए जा रहे तापमान को शुक्रवार को इंद्रदेव ने डाउन कर दिया। देर शाम धूल भरी आंधी के बाद हल्की बरसात के बाद मौसम कूल हो गया। हल्की बरसात से किसानों की गेहूं की फसलों को फायदा होगा।
मौसम विभाग ने दो दिन पहले 4 और 5 मार्च को हल्की बरसात की संभावना जताई थी। मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हुई। पिछले तीन दिन से तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा था।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण शुक्रवार शाम मौसम में बदलाव आया। पहले धूल भरी आंधी चली। इसके बाद हल्की बरसात ने लोगों को राहत प्रदान की। बरसात के कुछ मिनट बाद ही तापमान में 11 डिग्री सेेल्सियस की गिरावट आई। अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से 22 डिग्री सेल्सियस तक आ गया। हवाओं की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई। हवा में करीब 71 प्रतिशत आद्रर्ता दर्ज की गई।
बरसात शुरू होते ही बिजली गुल
शाम करीब साढे़ छह बजे से ही धूल भरी तेज हवाएं चलना शुरू हो गई थी। इसके कुछ देर बाद ही मेघ गर्जना और बिजली चमकने के साथ बरसात शुरू हो गई। बिजली निगम ने बरसात शुरू होते ही हिसार के शहर के सात फीडरों को बंद कर दिया, जिसके बाद शहर में अंधेरा हो गया। गलियों में अंधेरा होने के चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली निगम के अधिकारियों ने कहा कि आंधी चलने पर कई जगह तार टूट जाती हैं। इस कारण सुरक्षा लिहाज से कुछ समय के लिए फीडरों को बंद किया गया।
पिछले साल एक मार्च को बरसा था 35 एमएम पानी
पिछले वर्ष एक मार्च की रात को बरसात आई थी। उस दिन करीब 35 मिलीमीटर पानी बरसा था। 8 मार्च के दिन भी बरसात रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद तापमान में एकदम से गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद मार्च महीने में रिकॉर्ड बरसात हुई। मार्च में ही कई जगह पर भारी ओलावृष्टि भी हुई थी।
मार्च 2015 में छह दिन हुई थी बरसात
पिछले साल मार्च में 1 मार्च, 7 मार्च, 14 मार्च, 15 मार्च, 16 मार्च, 29 मार्च को बरसात हुई थी। मार्च 2015 में मौसम विभाग ने करीब 89 एमएम बरसात रिकॉर्ड की थी। इसमें एक मार्च की सबसे जोरदार बरसात थी। इसके बाद लगातार बरसात ने फसलों को फायदा पहुंचाने की बजाए नुकसान किया।
बरसात का रिकॉर्ड
वर्ष बरसात
2009 7.1 एमएम
2010 2.7 एमएम
2011 13.3 एमएम
2012 0 एमएम
2013 39 एमएम
2014 29.9एमएम