हाईकमान के आगाह करने के बावजूद कांग्रेस में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर की मौजूदगी में एक बार फिर से जमकर हंगामा हुआ। कुछ युवकों ने सीएम के खिलाफ अनदेखी का आरोप लगाते हुए उनके विरोध में नारेबाजी की और कुमारी सैलजा जिंदाबाद के नारे लगाए।
पुलिस प्रदर्शन कर रहे लगभग आधा दर्जन युवकों को पकड़कर अपने साथ ले गई। बताया जा रहा है कि पकड़े गए युवकों में सीएम की लगातार खिलाफत कर रहे विधायक नरेश सेलवाल का भांजा भी है। इससे पहले लगभग हर जिले में हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में भी हंगामा हो चुका है।
शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से अनाज मंडी में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर, स्थानीय निकाय मंत्री सावित्री जिंदल, मुख्य संसदीय सचिव विनोद भ्याणा, विधायक संपत सिंह, रामनिवास घोड़ेला, नरेश सेलवाल ने हिस्सा लिया। इसी दौरान कुछ युवकों ने सीएम के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
कार्यकर्ता सम्मेलन में कुछ युवकों ने भूपेंद्र हुड्डा मुर्दाबाद, कुमारी सैलजा जिंदाबाद के नारे लगाए। पुलिस ने इन युवकों को हिरासत में ले लिया। कुछ मिनट बाद ही दूसरी ओर से भी नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस ने आरोपियों को भगाने के लिए हवा में लाठियां भी चलाईं। कुछ युवकों को हिरासत में लिया, जिसमें एक युवक विधायक नरेश सेलवाल का भांजा बताया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने हंगामा करने वालों को पार्टी से निकालने का ऐलान किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार का कोई विद्रोह नहीं है। कांग्रेस ने पूरे हरियाणा में विकास किया है और आगे भी लोगों को साथ लेकर पार्टी विकास करेगी। हरियाणा में तीसरी बार भी कांग्रेस की सरकार बनेगी।
हमारी आवाज नहीं सुनी
प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव योगेश सिहाग ने कहा कि हम कार्यकर्ता सम्मेलन में अपनी बात रखना चाहते थे। इस कारण सीएम तक पहुंचने का प्रयास कर रहे थे। हमारी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने हमें रोका तो नारेबाजी कर विरोध जताया। इसके बाद पुलिस ने वहां से जबरदस्ती उठा लिया। अगर कार्यकर्ता सम्मेलन में ही कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी तो इसका क्या मतलब।
गेट पर पूरी तलाशी ली गई
सीएम के सम्मेलन में पहुंचने वालाें की गेट पर पूरी तलाशी ली गई। काली शर्ट वालों को अंदर नहीं जाने दिया गया। काली जुराब बाहर ही निकला ली गई। काली चुनरी वाली महिलाओं को भी रोक लिया गया।
अधिकतर कुर्सियां नजर आईं खाली
सम्मेलन के बीच में ही आधी जनता उठकर चली गई। इसके चलते पिछले हिस्से की अधिकांश कुर्सियां खाली हो गईं। सम्मेलन में करीब 1700 कुर्सियां लगाई गई थीं। सम्मेलन में महिलाओं की संख्या भी बेहद कम रही।