आखिरकार हिसार-चंडीगढ़ (एनएच-65) नेशनल हाईवे को फोरलेन बनाने का टेंडर हो ही गया। मगर इसका निर्माण कार्य शुरू होने अभी छह महीने का समय और लगेगा। इस टाइम पीरियड में काम का ठेका लेेने वाली कंपनी को प्रोजेक्ट की लागत का कुछ प्रतिशत हिस्सा बीएंडआर को जमा कराना होगा।
साथ ही उसे प्रोजेक्ट को पूरा करने में आने वाले खर्च के सोर्स के बारे में भी बताना होगा। उधर, बीएंडआर को इसी टाइम पीरियड में कंपनी को साइट क्लीयर कराकर देनी होगी।
हिसार से कैथल तक फोरलेन बनने वाला यह हाईवे ढाई साल में बनकर तैयार होगा। फिलहाल इसका थ्रीडी (जमीन का अधिग्रहण) का काम पूरा हुआ है। जल्द ही उन लोगों को मुआवजा दिया जाएगा, जिनकी जमीन इस हाईवे के लिए अधिगृहित की गई है।
दो बार मांगे गए टेंडर
इस प्रोजेक्ट के लिए दो बार टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं। पहली बार में तो एकमात्र आवेदन करने वाली कंपनी के नाम पर कोई विचार नहीं किया गया था। उधर, दूसरी बार भी एकमात्र कंपनी ने ही आवेदन किया था। मगर एंपावरमेंट कमेटी ने विचार करने के बाद उस कंपनी को टेंडर दे दिया।
हिसार-चंडीगढ़ हाईवे को फोरलेन बनाने का कार्य बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) के तहत किया जाना है। अंबाला से कैथल तक का निर्माण कार्य कैथल जोन और कैथल से हिसार (राजस्थान बॉर्डर) तक का निर्माण कार्य हिसार जोन के अंतर्गत आता है। कैथल के हिसार तक इसकी लंबाई 145 किलोमीटर है और इसकी टीपीसी 1173 करोड़ रुपये के लगभग है। फोरलेन के बाद हाईवे की चौड़ाई 60 मीटर हो जाएगी। बीओटी के तहत बनने वाले इस फोरलेन हाईवे पर कैथल से हिसार तक तीन टोल टैक्स बनाए जाने प्रस्तावित हैं।
एकमात्र आवेदन करने वाली कंपनी टेंडर दिया गया है। अगले महीने के शुरू में एग्रीमेंट हो जाएगा। मगर काम शुरू होने में छह महीने का समय लग सकता है। यदि औपचारिकताएं जल्दी पूरी हो जाती हैं तो शायद काम छह महीने से पहले भी शुरू हो जाए। वीके जैन, प्रोजेक्ट निदेशक, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया