हड़प्पाकालीन सभ्यता को लेकर पूरे देश में प्रसिद्ध राखी गढ़ी के टीलों पर खुदाई का काम जारी है। खुदाई के दौरान पहली बार चौकाने वाले तथ्य सामने आएं हैं। अभी तक सिर्फ मानव कंकाल ही सामने आ रहे थे। शुक्रवार को खुदाई में पशु का कंकाल भी सामने आएं हैं। कंकाल को देखकर अनुमान लगाया लगाया जा रहा है कि यह किसी पालतू जानवर का कंकाल है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह किस पशु का है। पूना यूनिवर्सिटी के छात्र इस कंकाल की जांच में जुट गए हैं। जल्द ही पता लगेगा कि ये किस पशु के कंकाल हैं।
गौरतलब है कि हड़प्पाकालीन संस्कृति के गांव राखी गढ़ी में पिछले एक माह से खुदाई का कार्य जारी है। खुदाई के दौरान साइट नंबर सात पर कुछ मानव कंकाल मिले हैं। वहीं, साइट नंबर दो पर हड़प्पा संस्कृति से जुड़े मकान व उनकी दीवारें निकली हैं। साथ ही एक पशु का कंकाल भी मिला है। पशु का कंकाल मिलने से यूनीवर्सिटी के छात्र काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि हड़प्पा संस्कृति के इतिहास में एक पन्ना और जुड़ गया है। इससे साबित होता है कि उस समय के लोग भी अपने घरों में पशुओं को रखते थे।
धीरे-धीरे रहस्यों से उठ रहा पर्दा, मकान मिले
इस बार खुदाई का कार्य डैकन यूनिवर्सिटी पुणे व हरियाणा पुरातत्व विभाग के द्वारा किया जा रहा है। अभी तक मिले मकानों व उनकी दीवारों को देखकर पुरातत्व विभाग के कर्मचारी व अधिकारी काफी खुश है। उन्हें उम्मीद है कि जैसे-जैसे गहरी खुदाई होती जाएगी वैसे वैसे अनेक रहस्यों से पर्दा उठता जाएगा। साइट नंबर दो पर एक अप्रैल से दोबारा शुरू हुई खुदाई में अभी तक मिट्टी की चूड़ियां, बर्तन, खिलौने, मिट्टी के मनके व चारकोल मिला था। वहीं, अब मकान भी निकलने शुरू हो गए हैं। मकानों के चारों ओर मिट्टी की दीवारें भी मिली हैं।
निर्माण और रहन-सहन के बारे में लगेगा पता
पुरातत्व विभाग के मंडल सहायक संरक्षक एसपी चालिया ने बताया कि राखी गढ़ी की खुदाई में अभी तक पुराने मकानों के साथ-साथ दीवारें भी निकलने लगी हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे खुदाई गहरी होती जाएगी उससे पुराने समय के मकानों के निर्माण व उनके रहन-सहन के बारे में पता चलता जाएगा। टीले नंबर दो पर पशु का कंकाल मिलने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वो अपने घरों में पशुओं को भी पालते थे।
पशुओं को दफनाने की थी परंपरा
जिस प्रकार आज भी इंसानों को रीति रिवाज के साथ दफनाया जाता है, उसी प्रकार हजारों साल पहले भी यही रीतिरिवाज पशुओं के साथ भी निभाए जाते थे। राखी गढ़ी में साइट नंबर दो पर हो रही खुदाई के दौरान एक पशु का सिर मिला है। जिसके पास मिट्टी के बर्तन, प्लेट, मटके व मालाएं आदि मिले हैं। जिनसे पुरातत्वविद अनुमान लगा रहे हैं कि जिस प्रकार आज रीतिरिवाज के साथ मनुष्यों को दफनाया जाता है उसी प्रकार हजारों साल पहले भी पालतू जानवरों को भी इसी प्रकार से रीतिरिवाज के साथ दफनाया जाता होगा।