जीजेयू में रिसर्चर चूहों की मौत मामले में जीजेयू प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामला मीडिया तक कैसे पहुंचा, इसको लेकर गुप्त तरीके से पूछताछ की जा रही है। टीचिंग स्टाफ और विद्यार्थी इस मामले पर आपस में बंट गए हैं। दबी जुबान से चूूहों की मौत का कारण एक-दूसरे को बताया जा रहा है। टीचर चूहों की मौत का कारण विद्यार्थियों के आपसी झगड़े को मान रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थी समय पर एसी ठीक न होने को मौत का कारण मान रहे हैं। पूरा मामला संज्ञान में होते हुए भी विभाग के जिम्मेवार अभी तक उनके पस इस मामले को लेकर शिकायत न होने की बात कह रहे हैं। उन्हें नहीं पता किये रिसर्चर चूहे क्यों, कैसे और कब मरे। हालांकि चूहों की मौत के बाद एनीमल हाउस में एसी ठीक करवाने का काम बुधवार को करवाया गया। वहीं एनीमल हाउस में दो अटेंडेंट की मांग पहले ही की जा चुकी है।
गौरतलब है कि जीजेयू प्रशासन की लापरवाही के कारण एनीमल हाउस में 200 से अधिक चूहों की गर्मी के कारण मौत हो गई थी, जिससे रिसर्चर विद्यार्थियों की रिसर्च अधूरी रह गई है। इनकी मौत अचानक एसी के बंद होने के बाद दोबारा चालू नहीं होने पर हुई थी। इन चूहों को 24 घंटे एक निश्चित तापमान पर रखना पड़ता है। बेहद गर्मी में जरूरी है कि उनके लिए एसी का प्रबंध हो। इसके साथ ही उनके रखरखाव के लिए 24 घंटे अटेंडेंट का रहना जरूरी है। एनीमल हाउस में केवल एक ही अटेंडेंट है, लेकिन वर्तमान में चूहों की देखभाल के लिए जरूरत के मुताबिक तीन अटेंडेंट का होना जरूरी है, ताकि रिसर्चर छात्र अपनी रिसर्च पर फोकस कर सके।
मुझे नहीं पता कि हमारे चूहे कब, क्यों और कैसे मरे हैं। मेरे पास ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई है। कोई शिकायत देगा, तभी इस मामले की जांच करेंगे। रही बात अटेंडेंट की तो हमने 10 दिन पहले ही दो अटेंडेंट की मांग की है। एसी ठीक करवाए जा रहे हैं।
डॉ. डीसी भट्ट, चेयरमैन, फार्मास्यूटिकल विभाग
मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच की जाएगी कि चूहों की मौत कैसे हो गई।
प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, जीजेयू