इंसान में कुछ करने का जुनून और जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी समस्या भी पल भर में बौनी साबित हो जाती है। क्योंकि पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान भरी जाती है। ऐसी ही एक छात्रा है पटेल नगर की श्रुति कौशिक, जिसने बुलंद हौसलों से माता-पिता के सपनों को पर लगा दिए हैं।
घर में जब कभी लाइट नहीं होती थी तो मोमबत्ती के सहारे पढ़ाई करती थी। कितनी भी बाधाएं आईं, लेकिन पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। हिसार से ही शुरुआती पढ़ाई करने के बाद उसने अपनी मेहनत का रंग इस कदर बिखेरा कि हाल ही उसका चयन अमेरिका में होने वाली एक इंटरनेशनल कांफ्रेंस के लिए हुआ। उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता और दादा बहुत खुश हैं।
शुरू से रही है अव्वल
मूलरूप से भिवानी के गांव मंढाणा की रहने वाली श्रुति के पिता ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई का कम और खेलने का ज्यादा शौक होता है, लेकिन श्रुति का मन पढ़ाई में ही लगता था। पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक हमेशा अव्वल रही। उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि अमेरिका में न्यूयार्क के नेवार्क में हो रही इंटरनेशनल कान्फ्रेंस ऑफ मशीन लर्निंग एंड डेटा माइनिंग विषय पर होने वाली कान्फ्रेंस के लिए उसका चयन हुआ।
न्यूयार्क जाने वाली श्रुति अपने आईआईटी की एकमात्र छात्रा है। इससे पहले वह डीआरडीओ में ट्रेनिंग भी कर चुकी है। श्रुति के पिता सुरेंद्र पाल कौशिक मुख्याध्यापक हैं व मां स्नेहलता क्लर्क हैं। श्रुति ने बताया की उन्हें पढ़ाई की प्रेरणा उनके दादा सेवानिवृत्त अध्यापक फतेहचंद शास्त्री से मिली थी। वे हमेशा पढ़ाई ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं।
शिक्षा में सुधार है मकसद
श्रुति ने बताया कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ-साथ सिस्टम में बदलाव लाने के उद्देश्य से काम रही है। उसका मकसद प्रोफेसर बनकर शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना है।
डांस और टेबल टेनिस का है शौक
श्रुति को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचि स्कूली टाइम से ही रही है। वह अच्छी डांसर होने के साथ-साथ टेबल टेनिस की एक बेहतरीन खिलाड़ी भी है।
ये की पढ़ाई
- आईआईटी मंडी, हिमाचल से पीएचडी कर रही।
- एमटेक (कंप्यूटर साइंस) में वनस्थली यूनिवर्सिटी (राजस्थान) से गोल्ड मेडल।
- 2014 में गेट पास किया
- बीटेक (आईटी) में बीआरसीएम बहल से सिल्वर मेडल
- दसवीं कक्षा में 93 प्रतिशत अंक
- बारहवीं में 84 प्रतिशत अंक