गांव किरोड़ी निवासी शमशेर बीते छह साल से अपने बेटे अशोक को न्याय दिलाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। वर्ष 2019 में अज्ञात वाहन की टक्कर से अशोक को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद वह कोमा में चला गया। आज छह साल बाद भी वह जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है, लेकिन हादसे के जिम्मेदार लोग अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
चार साल बाद दर्ज हुआ केस, फिर भी नहीं मिली राहत
पीड़ित पिता शमशेर ने बताया कि उनका बेटा अशोक फोटोग्राफी का काम करता था। 2019 में जब वह अपनी बाइक से जुगलान से किरोड़ी लौट रहा था, तब अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। इस हादसे में अशोक बुरी तरह घायल हो गया और कोमा में चला गया। पुलिस से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्होंने केस दर्ज नहीं किया। पुलिसकर्मी कहते रहे कि जब पीड़ित खुद बयान देगा, तभी केस दर्ज होगा। अंततः चार साल बाद, 2023 में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
परिवार पर टूटा आर्थिक संकट
अशोक की इस गंभीर हालत ने उसके परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है। शमशेर ने बताया कि बेटे के इलाज पर अब तक 15 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। दिहाड़ी मजदूरी करने वाला परिवार इतने बड़े खर्च को उठाने में असमर्थ है। अशोक की पत्नी और उसका बेटा, जो हादसे के तीन महीने बाद पैदा हुआ था, पिछले छह साल से उसके ठीक होने की राह देख रहे हैं।
प्रशासन और सरकार से नहीं मिली कोई मदद
शमशेर ने बताया कि वह न्याय की गुहार लगाते हुए डीसी, एसपी से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द दोषियों की गिरफ्तारी और परिवार को आर्थिक सहायता की मांग की है।