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Hisar News: एनएचएम कर्मचारियों की सुविधाएं रोकने पर खुद फंसा स्वास्थ्य विभाग

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हिसार। जिले के 450 एनएचएम कर्मचारियों का भत्ता-इंसेंटिव-सैलरी पे ग्रेड-सातवां वेतन सहित सेवा नियमों का लाभ देने से इंकार करने पर अब स्वास्थ्य विभाग खुद फंसता नजर आ रहा है। क्योंकि एक-एक करके 25 एनएचएम कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर स्टे आर्डर ले लिया है, जबकि शेष कर्मचारी भी हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं।
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अगर ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में उपरोक्त मांग को लेकर हाईकोर्ट में एकमात्र जिले से 400 से अधिक याचिका दायर हो जाएंगी। जबकि स्वास्थ्य विभाग उलझन में फंस चुका है कि किन कर्मचारियों को एनएचएम के अंतर्गत लाभ देना है और किसे नहीं। इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई अधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई, जिस पर कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।
वित्त विभाग के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने लगाई थी रोक
जानकारी के मुताबिक 2018 में सरकार की ओर से एनएचएम कर्मचारियों के लिए सेवा नियम बनाने की घोषणा की थी, जिसमें भर्ती-वेतन-भत्ता-इंसेंटिव-सैलरी पे ग्रेड-सातवां वेतन देने का आदेश भी लागू किया था, लेकिन उसके बाद प्रति वर्ष सरकार ने कोई न कोई ऑब्जेक्शन व आश्वासन के बल पर सेवा नियम से लेकर उपरोक्त बिंदुओं को लागू करने से इंकार करता रहा, लेकिन अब वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट कर दिया है कि वे एनएचएम कर्मचारियों को उपरोक्त में से किसी का लाभ नहीं देंगे।
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स्वीकृत पद 840, रिक्त है 390
हिसार जिले में एनएचएम के अंतर्गत कुल 840 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 390 पद रिक्त हैं, जिस पर अभी तक कोई भर्ती नहीं की गई है। 450 एनएचएम कर्मचारी जिले में विभिन्न शाखाओं में सेवाएं दे रहे हैं। खास बात है कि दिसंबर में सरकार ने उपरोक्त रिक्त पदों पर फाइनल लिस्ट जारी करनी थी, लेकिन वित्त विभाग के आदेश पर उपरोक्त भर्ती प्रक्रिया पर भी रोक लग गई।
ये सुविधाएं हो रही प्रभावित
1. एंबुलेंस सेवा
2. जच्चा बच्चा स्वास्थ्य सेवा
3. मानसिक रोगियों की स्वास्थ्य सेवा
4. आंगनबाड़ी व स्कूल में 0 से 18 साल तक बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल सेवा
5. आयुर्वेद से जनता का इलाज सेवा
6. सरकार के सभी स्वास्थ्य पोर्टल का सुचारू रूप से चलाने
7. बच्चों का टीकाकरण
8. एनीमिया मुक्त हरियाणा करने में अहम भूमिका
9. टीबी मुक्त हरियाणा में अहम भूमिका

सरकार की अनदेखी के कारण एनएचएम कर्मचारी परेशान हैं। अब तो हमें केवल एकमुश्त सैलरी देने का मन सरकार बना रही है, जोकि गलत है। जबकि सरकार ने खुद 2018 में सेवा नियम बनाने की घोषणा कर अंतर्गत कर्मचारी को भर्ती-वेतन-भत्ता-इंसेंटिव-सैलरी पे ग्रेड-सातवां वेतन देने का वादा भी किया था, जिसे लागू करने से स्वास्थ्य विभाग ने साफ इंकार कर दिया है। जब तक आदेश लागू नहीं होंगे तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। - जगत बिसला, प्रदेश महामंत्री, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ हरियाणा।
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