कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओं के बीच में गुटबाजी की चर्चा तो लोकसभा चुनावों से ही चल रही थी, लेकिन इसका सबूत मिला रविवार को कांग्रेस भवन में आयोजित पार्टी की बैठक में। रविवार को कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गुटबाजी खुलकर सामने आई।
गुटबाजी के चलते हालात यहां तक पैदा हो गए कि जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में बतौर ऑब्जर्वर पहुंचे कृष्णमूर्ति हुड्डा को मीटिंग के बीच में उठकर जाने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता प्रो. रामभगत शर्मा ने जब मंच से यह कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में तीसरी बार प्रदेश में सरकारी बनेगी।
उसी समय दूसरे गुट ने इस बात आपत्ति जताते हुए कहा कि अगले सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा होंगे या नहीं, इस बात का फैसला हाईकमान करेगा, न कि आप। इसी बात को दोनों गुटों के समर्थक आमने-सामने हो गए और अपने-अपने नेताओं के नारे लगाने लगे। हालांकि बार-बार उन्हें समझाया गया कि वह शांति बनाए रखें। मगर जब बात नहीं बनी, तो ऑब्जर्वर कृष्णमूर्ति हुड्डा और मंत्री सावित्री जिंदल मीटिंग छोड़कर चले गए।
इस मीटिंग में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली। ज्यादातर कार्यकर्ताओं का यही कहना था कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। पार्टी में उन्हीं को पदाधिकारी बनाया जाता है, जो हलका विधायक की चापलूसी करते हैं।
उधर, एक बार जो एमएलए या एमपी बन जाता है, वह मीटिंग में आना ही जरूरी नहीं समझता। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि पार्टी में ऐसे लोगों को पदाधिकारी बनाया जाए, जो कार्यकर्ताओं के साथ रोज सड़कों पर उतरें। साथ ही ऐसे एमपी व एमएलए पर पाबंदी लगाई जाए, जो मलाई खाकर चले जाते हैं।
मीटिंग में कार्यकर्ताओं ने खुलकर पदाधिकारियों और विधायकों पर आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के लिए वोट ही नहीं मांगे और न ही वे बूथों पर कहीं नजर आए। एक कार्यकर्ता ने तो यहां तक कह दिया कि कुछ कांग्रेसी नेता तो चुनाव में यह कह रहे थे कि वे इनेलो को वोट देंगे।
उधर, विधायक प्रो. संपत सिंह बैठक में ज्यादा देर नहीं रहे। चंडीगढ़ में जरूरी काम होने का हवाला देकर वह पहले ही कार्यकर्ताओं को संबोधित करके चले गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर सच बोलूंगा तो ज्वालामुखी फूटेगा। हर बात का लेखा-जोखा मुख्यमंत्री के पास होता है और सीआईडी रिपोर्ट भी सीएम के पास जाती है। उस रिपोर्ट को देखने और समझने के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
साथ ही उन्होंने कहा कि उनके चुनाव में जिन लोगों ने खुलेआम दूसरी पार्टी के उममीदवारों की मदद की है, उनकी हैसियत उनको हराने की नहीं थी। हैरानी की बात यह भी है कि चुनाव के दौरान तीन दिन पहले दूसरे दलों में ज्वाइन करने औरर मदद करने वाले आज कांग्रेस को दोबारा ज्चाइन किए बिना पार्टी की बैठक में आम कार्यकर्ता की कुर्सी की बजाय मंच पर बैठे हैं। चुनाव में वे आरंभ से ही न तीन में थे और न 13 में। चुनाव में वे मुकाबले में ही नहीं थे।
मीटिंग में माटी कला बोर्ड के चेयरमैन व कांग्रेसी नेता भूपेंद्र गंगवा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिला पिछड़ा वर्ग का जनाधार खिसका है। जींद में हो रहे सम्मलेन के जरिये इस जनाधार को वापस प्राप्त किया जाए। भूपेंद्र गंगवा ने भी ऑब्जर्वर के सामने यही बात कही कि पदाधिकारी मीटिंग में नहीं आते। उन्हें मीटिंग में अवश्य आना चाहिए।
प्रो. रामभगत शर्मा ने कहा कि जो प्रशासनिक अधिकारी कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते, ऐसे अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए, जिससे कार्यकर्ताओं में यह मैसेज जाए कि पार्टी में उनका भी कुछ महत्व है। जो कार्यकर्ता अपने किसी परिजनों का ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, तो उनका ट्रांसफर कराया जाए। विधानसभा चुनावों में अभी दो महीने बाकी हैं। इन दो महीनों में कार्यकर्ताओं के ज्यादा से ज्यादा काम हों।
बैठक में ये नहीं थे उपस्थित
बैठक में विधायक रामनिवास घोड़ेला और नरेश सेलवाल उपस्थित नहीं थे। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक रामनिवास घोड़ेला एक कार्यक्रम में व्यस्त रहे और नरेश सेलवाल के किसी परिजन का देहांत हो गया, इस कारण वे मीटिंग में नहीं आ सके।
बैठक के दौरान कई बार पार्टी कार्यकर्ता एक-दूसरे के आमने सामने हो गए। कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने नेताओं के जयकारे बैठक में लगाना शुरू कर दिए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के समझाने के बाद भी कार्यकर्ता यहां नहीं रुके और उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को ही भाषण देने शुरू कर दिए।
जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में बतौर ऑब्जर्वर पहुंचे कृष्णमूर्ति हुड्डा ने मीटिंग के बाद एक प्रेसवार्ता भी की। इस दौरान मीटिंग में हुए हंगामे पर सफाई देते हुए कहा कि पार्टी में दो-तीन तत्व ऐसे हैं, जो गुमराह हो गए हैं और उन्होंने साजिश के तहत मीटिंग के माहौल को खराब किया है।
वह फिर से दोबारा कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करेंगे। उनके नाम बताने पर हुड्डा ने कहा कि उनके नाम सार्वजनिक करने ठीक नहीं है, वैसे भी आप इनके नाम जानते ही हैं। कार्यकर्ताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग पार्टी से असंतुष्ट हैं। मीटिंग में उन्हें प्रजातांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने का मौका दिया गया है। उनकी बातों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में कुछ नए चेहरों को भी उतारे जाने की बात कृष्णमूर्ति हुड्डा ने कही। इस दौरान मंत्री सावित्री जिंदल, सीपीएस विनोद भ्याणा, भूपेंद्र गंगवा, प्रो. रामभगत शर्मा, कुलबीर बैनीवाल, प्रो. छत्रपाल, धर्मवीर गोयत, जेपी ज्याणी आदि उपस्थित थे।