चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जुड़ा है। इस विश्वविद्यालय को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्य में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र के अवॉर्ड से नवाजा गया है।
कुलपति डॉ. केपी सिंह ने बताया कि राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा हाल ही में मथुरा में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में इस विश्वविद्यालय द्वारा सरसों, राया में किए गए उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा की गई तथा इसे वर्ष 2015-16 का सर्वश्रेष्ठ केंद्र का अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह अवॉर्ड भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. जेएस संधू ने प्रदान किया।
बैठक में अनुसंधान निदेशक डॉ. एसएस सिवाच, आनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आईएस यादव और तिलहन अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. आरके श्योराण सहित तिलहन अनुसंधान में जुटे करीब 10 वैज्ञानिक उपस्थित थे। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. सिवाच ने बताया कि इससे पूर्व इस तिलहन अनुभाग को वर्ष 2012-13 का भी सर्वश्रेष्ठ केंद्र का अवॉर्ड प्राप्त हो चुका है।
उन्होंने इस अनुभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस केन्द्र ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सरसों की अनेक किस्मों तथा इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकों का विकास किया है।
किसानों में अति लोकप्रिय सरसों की आरएच 30 और आरएच 8812 (लक्ष्मी) के अतिरिक्त हाल ही के वर्षों में इस केंद्र द्वारा सिंचित क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए सरसों की आरएच 0749 किस्म तथा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली एवं राजस्थान के बारानी क्षेत्रों में समय पर बिजाई के लिए सरसों की आर एच 0406 किस्म विकसित की गई हैं।
इसी प्रकार आरएच 0119 किस्म को हरियाणा के बारानी क्षेत्रों के लिए और पीली सरसों की वाईएसएच 0401 किस्म को संपूर्ण भारत के लिए विकसित किया है। उन्होंने कहा इन तकनीकों को अपनाने से हरियाणा आज सरसों की उत्पादकता में भारत में अग्रणी प्रदेश है।