हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थी कृषि संबंधी विभिन्न कोर्सों में दाखिला ले सकते हैं। विवि में बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स में दाखिले को लेकर सबसे अधिक होड़ रहती है। इस कोर्स को करने के बाद विद्यार्थी खेती के डॉक्टर बनते हैं। विवि के वैज्ञानिक कहते हैं कि यहां से पढ़ाई के बाद विद्यार्थियों को नौकरी मिलना तय है, लेकिन नहीं भी मिलती तो विद्यार्थी खेती वैज्ञानिक ढंग से करके आमदनी में इजाफा कर सकते हैं।
इस विवि की स्थापना फरवरी 1970 में हुई थी। यह विश्वविद्यालय एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है। इसका नाम भारत के सातवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखा गया था। पहले यह विश्वविद्यालय पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का हिसार में एक केंद्र था। आजादी के बाद यहां पीएयू से संबंद्ध वेटरिनरी कॉलेज चलता रहा, जिसे बाद में हरियाणा के निर्माण के बाद स्वायत्त संस्थान हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय घोषित किया गया। वर्ष 1981 में इसका नामकरण चौधरी चरण सिंह के नाम पर किया गया। भारत की हरित क्रांति और श्वेत क्रांति में इस विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है।
कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में 1 सीट के लिए होते हैं 100 दावेदार -
विवि में कुल 8 कॉलेज हैं, जिनमें से 6 कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी दाखिला ले सकते हैं। विश्वविद्यालय का सबसे प्रमुख कॉलेज है कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर। इस कॉलेज में विद्यार्थियों के बीच दाखिले के लिए खूब मारामारी होती है। हालात ऐसे होते हैं कि एक सीट के लिए 100 से अधिक आवेदन आते हैं। विवि में होम साइंस कॉलेज को छोड़कर सभी बीएससी कोर्सों में दाखिले प्रवेश परीक्षा के आधार पर होते हैं। वहीं, बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश तकनीकी शिक्षा विभाग हरियाणा द्वारा किया जाता है।
तीन एग्रीकल्चर कॉलेज, बावल में, 10वीं आधार पर होता है दाखिला -
विश्वविद्यालय में कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर में बीएससी एग्रीकल्चर के दो कोर्स हैं। पहला छह वर्षीय, जिसमें 10वीं के बाद दाखिला लिया जा सकता है। यह कोर्स केवल विवि के रेवाड़ी के बावल स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में होता है। हालांकि प्रवेश परीक्षा केवल हिसार स्थित विवि कैंपस में ही होगी। वहीं, एक कॉलेज कौल में और एक विवि कैंपस में है। तीनों कृषि कॉलेजों में चार वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर कोर्स में विद्यार्थी दाखिला ले सकते हैं।
बिजनेस और बेसिक साइंस कॉलेजों में केवल पीजी कोर्स
विवि में स्थित बेसिक साइंस एंड ह्यूमेनिटिज साइंस कोर्स में केवल स्नातकोत्तर कोर्सों एमएससी व पीएचडी में ही दाखिला लिया जा सकता है। इसके अलावा विवि के गुरुग्राम स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेेजमेंट एग्रीप्रन्योरशिप में भी केवल स्नातकोत्तर कोर्सों में ही दाखिला होता है।
विशेषताएं -
- उत्तर भारत का एकमात्र एग्रीबिजनेस सेंटर। आइडिया हो तो यहां से शुरू कर सकते हैं कृषि व्यवसाय।
- प्रत्येक विभाग में प्रेक्टिकल कार्यों पर रहता है अधिक फोकस
- होम साइंस कॉलेज में जो सीखा, वो ग्रामीण महिलाओं को सीखाना पड़ता है तभी मिलती है डिग्री।
- कृषि विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में आईसीएआर का सर्वश्रेष्ठ संस्थान।
- वर्ष 2017 में मिला किसान रत्न पुरस्कार।
कॉलेज, कोर्स और सीटें -
कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर हिसार
- बीएससी ऑनर्स चार वर्षीय - 124 सीट
कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर कोल
- बीएससी ऑनर्स चार वर्षीय - 29 सीट
कॉलेज ऑफ बीएससी एग्रीकल्चर बावल
- बीएससी ऑनर्स चार वर्षीय - 25 सीट
- बीएससी ऑनर्स 6 वर्षीय - 50 सीट
कॉलेज ऑफ फिशरीज हिसार -
- बैचलर इन फिशरीज साइंस - 20 सीट
कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड टैक्नोलॉजी
- बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग - 35 सीट
- बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग लेटरल एंट्री - 04 सीट
आईजी कॉलेज ऑफ होम साइंस -
बीएससी ऑनर्स इन कम्यूनिटी साइंस चार वर्षीय - 94 सीट
कॉलेज ऑफ बेसिक साइंस एंड ह्यूमेनिटिज
- इंस्टिट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट एग्रीप्रन्योरशिप, गुरुग्राम
आवेदन के लिए योग्यता -
- बीएससी चार वर्षीय कोर्स में आवेदन के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री, गणित या बायोलॉजी के साथ 12वीं में 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। कम से कम 16 उम्र हो आयु।
- छह वर्षीय कोर्स में 60 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं अनिवार्य है। कम से कम 14 वर्ष हो आयु।
- बैचलर इन फिशरिज साइंस में आवेदन के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री, गणित या बायोलॉजी के साथ 12वीं में 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य।
- बीएससी इन कम्यूनिटी साइंस कोर्स केवल छात्राओं के लिए है। इसमें दाखिले के लिए विज्ञान या गृह विज्ञान संकाय के साथ 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों का होना जरूरी है।
- बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में दाखिले सरकार के नियमों के अनुसार होते हैं।
विवि में सबसे अधिक प्रचलित कोर्स बीएससी एग्रीकल्चर में दाखिले प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही लेने की योजना है। हालांकि इसके लिए अगले सप्ताह होने वाली शिक्षा परिषद की बैठक और सरकार के फैसले के बाद ही अंतिम फैसला होगा। वहीं, कुछ कोर्सों में सीटों में भी बढ़ोतरी की भी संभावना है। कोविड व 12वीं के परिणामों में देरी के कारण दाखिला प्रक्रिया में देरी हो रही है। दाखिला प्रक्रिया कब शुरु होगी, इसकी सूचना वेबसाइट पर दे दी जाएगी। - प्रो. बीआर कांबोज, कुलपति, एचएयू