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जीजेयू में साकार हो उठी हरियाणवी संस्कृति

Sat, 28 Nov 2015 12:47 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
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जीजेयू शुक्रवार को हरियाणवी संस्कृति से लबरेज नजर आया। अवसर था राज्य की स्थापना की स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में लोक संस्कृति पर आधारित दो दिवसीय प्रदर्शनी का।
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प्रदर्शनी में ग्रामीण परिवेश को जीवंतता के साथ दिखाया गया। बच्चे के जन्म पर ग्रामीण परिवेश में कुआं पूजन की परंपरा को जीवन्त रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को सामाजिक संदेश देने की कोशिश की गई।

वहीं, ग्रामीण रसोई, पुराने समय में अनाज को सुरक्षित रखने के तरीके, खेतों में पक्षियों से फसल की रखवाली के लिए प्रयोग किए जाने वाले पुराने तरीके, हाथ से आटा पीसने व दूध बिलोने के तरीकों, मिट्टी की बनी हांडी में ईंटों से बने चूल्हे पर खाना बनाने के पारंपरिक तरीकों को दर्शाया गया।
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प्रदर्शनी में पुराने समय में उपयोग होने वाले,  औजारों, बर्तनों व परिधानों को भी दिखाया गया। इससे पहले प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो.  टंकेश्वर कुमार ने कहा कि संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है।

प्रदर्शनी में पुरानी पीढ़ी के संस्कारों को सहेजने की कोशिश की गई है जो कि सराहनीय है।  विश्वविद्यालय में लोक संस्कृति पर शुरू हुई प्रदर्शनी विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक प्रयास है।

उन्होंने कहा कि हमारा आज ही नहीं बीता हुआ कल भी बेहतर रहा है जो कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर में दिखाई देता है। राज्य ग्रामीण विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेन्द्र खट्टर ने कहा कि प्रदर्शनी को देखकर पुराना जमाना याद आ गया। 

हमारा  पहनावा, हमारी संस्कृति पश्चिम सभ्यता की भेंट चढ़ता जा रहा है।  युवाओं को पुरानी संस्कृति को कायम रखने व सहेजने के लिए प्रयास करने चाहिए।

स्वागत भाषण प्रदर्शनी के संयोजक बिजेन्द्र दहिया ने प्रस्तुत किया। सोनल दहिया ने मर्मस्पर्शी कविता ‘पत्थर की अहिल्या पर आंसू टपकाने आई हूं, बेटी के गौरव को समझो मैं चेताने आई हूं’ प्रस्तुत कर दर्शकों को आश्चर्यचिकित कर दिया। 

प्रदर्शनी में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। मयूर रंगमंच की मुख्य  स्टेज पर अर्चना सुहासिनी के नेतृत्व में खुशी के विशेष मौकों पर गांव में आयोजित होने वाले पुराने समय का लोक नृत्य भी प्रस्तुत किए गए।

समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एम.एस. तुरान ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. कुलदीप सिंह, अजीत सिंह व रघुविन्द्र मलिक उपस्थित थे।
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