भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान के उलट प्रदेश में इस माह में सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। एक जून से अब तक प्रदेश में सामान्य से 42 प्रतिशत कम पानी बरसा। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार सामान्य से भी ज्यादा बारिश की संभावना जताई थी। हालांकि मौसम विशेषज्ञ की मानें तो मानसून टर्फ (कम दबाव के क्षेत्र की रेखा) का सामान्य स्थिति न रहना और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र लगातार न बनना इसकी मुख्य वजह है।
बता दें कि हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में समय से पहले मानसून की धमाकेदार एंट्री हुई थी, मगर इसके बाद से लगातार मानसून कमजोर बना हुआ है। इन पूरे क्षेत्र पर बिखराव वाली खंड बारिश हो रही है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक अच्छी बारिश के पीछे मानसून टर्फ की बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि यहां से यह रेखा गुजरती है, उन एरिया में अच्छी बारिश होती है। इस बार मानसून टर्फ ज्यादातर राजस्थान पर रही। यही कारण है कि इस बार राजस्थान में अच्छी बारिश हुई है।
तीन जिलों को छोड़कर बाकी में सामान्य से कम बारिश
इस माह में तीन जिलों को छोड़कर बाकी सभी में सामान्य से कम बारिश हुई है। जिन तीन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है, उनमें महेंद्रगढ़, नूंह व फतेहाबाद शामिल है। महेंद्रगढ़ में सबसे ज्यादा सामान्य से 35 प्रतिशत अधिक पानी बरसा है। वहीं, रोहतक में सबसे कम सामान्य से 70 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पिछले वर्षों में जुलाई में हुई बारिश
वर्ष-बारिश
- 2020-161.1 एमएम
- 2021-256.0 एमएम
- 2022-219.0 एमएम
- 2023-237.1 एमएम
- 2024-85.7 एमएम (28 जुलाई तक)
आगे ऐसा रहेगा मौसम
31 जुलाई को पश्चिम बंगाल के ऊपर एक और कम दबाव वाला क्षेत्र बनेगा। यह उत्तरी हिस्से में बनेगा। इसके अलावा 31 को ही उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय होगा। इन दोनों के असर से मानसून टर्फ के हरियाणा पर आने की संभावना है। इन सभी के प्रभाव से 6 अगस्त तक बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना है। 8 अगस्त के बाद मानसून के थोड़ा कमज़ोर होने की उम्मीद है, क्योंकि इसके बाद कोई मजबूत कम दबाव वाला सिस्टम बनने की संभावना नहीं है। अगला कम दबाव का क्षेत्र 17 अगस्त के बाद ही बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन सकता है। इसे देखते हुए संभावना है कि अगस्त में भी कम पानी ही बरसेगा।