पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल और रामजीलाल की दोस्ती वर्ष 1960 में हुई थी। उसके बाद से उनमें लगातार घनिष्ठता बढ़ती गई। वर्ष 1960 में आर्य नगर पंचायत के चुनाव हुए, जिनमें रामजीलाल सरपंच चुने गए थे। उसी समय आदमपुर पंचायत चुनाव में भजनलाल पंच बने थे। दोनों खंड समिति सदस्य होने के नाते मिलते थे।
खंड समिति के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ तो रामजीलाल ने भजनलाल को अपना वोट देकर उन्हें खंड समिति का अध्यक्ष बनने में मदद की थी। उसके बाद से उनकी दोस्ती शुरू हुई और यह दोस्ती घनिष्ठता में बदल गई। यही कारण था कि भजनलाल ने उन्हें दो बार राज्यसभा भिजवाया। उनकी दोस्ती का आलम यह था कि मुख्यमंत्री होते हुए भी भजनलाल किसी भी कार्यक्रम में अपने मित्र रामजीलाल को अपनी कुर्सी के साथ बगल में बैठाते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल का निधन तीन जून 2011 को हुआ था। 1960 से 2011 तक 51 साल तक भजन और रामजीलाल के पारिवारिक संबंध बन गए थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में इन पारिवारिक रिश्तों में कुलदीप बिश्नोई की वजह से थोड़ी दरार आई थी। रामजीलाल इस चुनाव में नलवा हलके से टिकट लेना चाहते थे लेकिन कुलदीप बिश्नोई ने हजकां से अपने बड़े भाई एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे चंद्रमोहन को यहां से प्रत्याशी खड़ा कर दिया था। इससे रामजीलाल थोड़े खफा हुए थे।
आर्य नगर का हुआ था उद्धार
रामजीलाल का पैतृक गांव आर्य नगर है, जिसका पुराना नाम कुरड़ी था। रामजीलाल के भजनलाल से घनिष्ठता के चलते आर्यनगर का सुधार हुआ था। आर्यनगर जो कभी एक सामान्य गांव की तरह ही होता था, भजनलाल की सरकार आने पर रामजीलाल की मांग पर गांव का सुधार कराया गया और आज भी ग्रामीण इस बात को मानते हैं। आज आर्य नगर कहने को गांव है लेकिन वहां जाने पर वह शहर प्रतीत होता है। इसके अलावा रामजीलाल अनेक सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं से जुड़े थे और ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। यही कारण रहा कि शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए।