दवा घोटाला उजागर करने पर हिसार के तत्कालीन सांसद (मौजूदा उप मुख्यमंत्री) को नशेड़ी बताने के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के बयान के खिलाफ दायर मानहानि की आपराधिक शिकायत में अब दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में दोस्तों ने समझौता करवा दिया है। उप मुख्यमंत्री के वकीलों ने 3 साल 11 महीने बाद अब यह केस वापस ले लिया है।
मामले के अनुसार 18 मार्च, 2018 को सांसद दुष्यंत चौटाला ने स्वास्थ्य विभाग में करोड़ो रुपये की दवा एवं उपकरण की खरीद मामले में चंडीगढ़ में प्रेस कान्फ्रेंस कर सुबूतों के साथ घोटाले को उजागर किया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने 3 अप्रैल, 2018 को दुष्यंत चौटाला को पत्रकार वार्ता में नशेड़ी बताते हुए उनको किसी नशा मुक्ति केंद्र से अपना इलाज करवाने की सलाह दी थी।
दुष्यंत चौटाला ने इस मामले को अपनी मानहानि माना और इस मामले में उनकी ओर से स्वास्थ्य मंत्री को नोटिस जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा था। परंतु विज की ओर से इसका कोई जवाब नहीं आया था। इसके बाद दुष्यंत ने अदालत में स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ केस दायर किया था।
इसके बाद उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने 7 जुलाई, 2018 को यह मामला दायर किया था। मामला दायर करने के करीब 15 माह बाद ही दुष्यंत चौटाला भाजपा-जजपा सरकार में उप मुख्यमंत्री बन गए और अनिल विज स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ गृह मंत्री भी बन गए थे। दुष्यंत चौटाला के अधिवक्ता पीके संधीर, संजीव सिंह और ध्रूव श्योराण अदालत में पेश हुए और दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बारे में अपने बयान दर्ज करवाए। इसके बाद अदालत ने यह केस खारिज कर दिया।
दुष्यंत सहित छह गवाह दर्ज करवा चुके थे गवाही
यह मामला 7 जुलाई, 2018 को अदालत में दायर किया गया था। 14 अगस्त, 2018 को दुष्यंत चौटाला ने न्यायिक दंडाधिकारी रिचू की अदालत में अपनी गवाही दर्ज करवाई। इसके बाद मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निधि बंसल के पास आया, जहां पर 15 सितंबर, 2018 को गवाह सहजवीर सिंह और सुखराज सिंह ने गवाही दर्ज की और 30 नवंबर, 2018 को एक और गवाह की गवाही हुई। इसके बाद 11 फरवरी, 2019 को प्रमोद जैन और दीपक भारद्वाज की गवाही दी। इसके बाद अनिल विज को समन जारी किया जाए या नहीं, पर बहस के लिए अदालत में 24 बार सुनवाई हुई लेकिन किसी न किसी कारण से बहस टल गई। इस दौरान कोविड-19 के कारण भी कई बार केस की सुनवाई टली।
ऐसे टलती रही मामले में सुनवाई
7 जुलाई, 2018 को अदालत में केस दर्ज किया गया और 14 अगस्त, 2018 को दुष्यंत चौटाला ने न्यायिक दंडाधिकारी रिचू की अदालत में अपनी गवाही दर्ज करवाई। इसके बाद मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निधि बंल के पास आया जिन्होंने 15 सितंबर, 2018 को दो गवाह सहजवीर सिंह और सुखराज सिंह ने गवाही दर्ज की और 30 नवंबर, 2018 को एक और गवाह की गवाही दर्ज की तथा 11 फरवरी, 2019 को प्रमोद जैन और दीपक भारद्वाज की गवाही दर्ज की गई। इसके बाद अदालत में इस बात पर बहस होनी थी कि अनिल विज को समन जारी किया जाए या नहीं।इसके लिए 19 मार्च, 2019 व 19 अप्रैल, 2019 को हुई सुनवाई के दौरान अनिल विज की तरफ से एक अधिवक्ता पेश हो गए और उन्होंने उनकी हाजिरी माफी का आवेदन भी अदालत में लगाया लेकिन बहस नहीं हुई। इसी प्रकर 10 मई, 2019 को भी बहस नहीं हुई।
20 जुलाई, 2019 को जज छुट्टी पर चली गई और 19 सितंबर, 2919 को मामला न्यायिक दंडाधिकारी वर्षा जैन की अदालत में आ गया। 19 अक्टूबर को जज छुट्टी पर चली गई। इसके बाद 15 नवंबर, 2019, 7 फरवरी, 2020 को सुनवाई हुई लेकिन बहस नहीं हुई।
27 मार्च, 22 मई, 17 अगस्त, 23 अक्टूबर, 2020 को कोविड के कारण मामले में सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 14 जनवरी, 2021, 25 फरवरी, 2021, 2 अप्रैल, 2021 को मामले की सुनवाई हुई लेकिन बहस नहीं हुई। इसके बाद मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिफा की अदालत में आ गया जिनकी अदालत में 21 मई, 2021 को कोविड-19 के कारण सुनवाई नहीं हुई जबकि 9 सितंबर, 2021 को सुनवाई हुई लेकिन बहस नहीं हुई। इसके बाद 29 सितंबर, 2021 को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नीरू कंबोज की अदालत में हुई लेकिन बहस नहीं हुई। इसके बाद 12 नवंबर, 2021 को न्यायिक दंडाधिकारी सोनिया की अदालत में सुनवाई हुई लेकिनन बहस नहीं हुई। 19 जनवरी, 2022 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निधि सोलंकी अदालत में कोविड-19 के कारण सुनवाई नहीं हुई। अब मामला न्यायिक दंडाधिकारी अंतरप्रीत की अदालत में है। इस अदालत में 12 अप्रैल, 2022, 25 अपै्रल, 2022 और 9 मई, 2022 को मामले की सुनवाई हुई लेकिन बहस नहीं हुई। गत 6 जून, 2022 को मामले की सुनवाई हुई और केस वापस ले लिया गया।