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Haryana: हिंदी आंदोलन की वजह से वजूद में आया था हरियाणा, फिर भी अब तक हिंदी में प्रकाशित नहीं हो सका गजेटियर

Wed, 01 Nov 2023 07:12 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमरनाथ, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)

सार

हिंदी सत्याग्रहियों के सपनों के अनुरूप सरकारी व अदालती कामकाज की भाषा नहीं है। प्रदेश में अब तक हिंदी में गजेटियर प्रकाशित नहीं हो सका है। हिसार का नया गजेटियर भी अंग्रेजी में प्रकाशित करवाने की तैयारी है।
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गजेटियर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदी आंदोलन की कोख से उपजे हरियाणा में सत्याग्रहियों के सपनों के अनुरूप अब भी सरकारी और अदालती कामकाज की भाषा हिंदी में नहीं हो सकी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि राज्य गठन के 57 साल बाद भी प्रदेश के किसी भी जिले में गजेटियर जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंदी में प्रकाशित नहीं हो सका। ऐसे में प्रदेश के आम लोग इसकी जानकारी से लगभग अपरिचित हैं। इस साल के अंत तक हिसार का नया गजेटियर आने वाला है, वह भी अंग्रेजी में। हालांकि नए गजेटियर में पंचायतों की संख्या के अलावा जनसंख्या में भी फर्क दिखेगा।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल में सभी जिलों में गजेटियर तैयार कराने का शासनादेश जारी किया है, लेकिन हरियाणा की बात करें तो विभागीय तालमेल न होने की वजह से दशकों से हिसार समेत कई जिलों के गजेटियर का प्रकाशन रुका है। हिसार स्थित अभिलेखागार के सहायक निदेशक अनिल कुमार बताते हैं कि हिसार का गजेटियर 1987 में अंग्रेजी में प्रकाशित करवाया गया था। उसके बाद सामाजिक-आर्थिक परिवेश में काफी बदलाव आया है, लेकिन नया गजेटियर अब तक नहीं आया है।

हिसार के गजेटियर के संपादन में अहम भूमिका निभाने वाले इतिहासकार डॉ. महेंद्र सिंह बताते हैं कि गजेटियर हिंदी में प्रकाशित करवाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 30 जून 2021 को पत्र लिखा था। उनका मानना है कि गजेटियर हिंदी में प्रकाशित होता तो लोग इसका अध्ययन कर अपनी संस्कृति, विरासत, परंपराओं, मूल्यों व आदर्शों को आत्मसात करते।
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उन्होंने गजेटियर तैयार कर राजस्व विभाग को सौंप दिया है। गजेटियर के प्रभारी विजेंदर बताते हैं कि नए गजेटियर में कई तथ्यों को जोड़ा गया है। चंडीगढ़ में संपादन का काम आखिरी दौर में चल रहा है। इस बार भी यह अंग्रेजी में ही गजेटियर प्रकाशित होगा।

क्यों जरूरी है गजेटियर
गजेटियर में जिले की सामान्य जानकारी, स्थापना का परिवेश, पृष्ठभूमि, इतिहास, प्रशासन, कृषि, उद्योग, व्यापार ,बैंकिंग व्यवस्था, राजस्व प्रणाली, संस्कृति, शिक्षा, सरकारी व गैर सरकारी समाजसेवी संस्थाएं एवं विभागों की योजनाओं के बारे में आंकड़ों के साथ विस्तार से प्रकाश डाला जाता है, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद मिल सके।

क्या था उद्देश्य
अंग्रेजी शासन काल में हिसार में पहली बार 1883 में गजेटियर का प्रकाशन हुआ था। इसके पीछे उद्देश्य विभिन्न जिलों व क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करना था, जिसके सहारे वे शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चला सके। उनकी भाषा अंग्रेजी थी तो यह उसी भाषा में तैयार हुए जिसके कारण उनका उद्देश्य पूर्ण हुआ।

पशु फार्म तब और अब
पुराने गजेटियर में जिक्र है कि एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पशु फार्म हिसार में है, लेकिन अब कई राष्ट्रीय संस्थानों के आने से इस फार्म का दायरा काफी सिमट गया है। यहां तक कि फार्म में पशुओं की संख्या भी काफी कम हो गई है। चारागाह भी पहले जैसा नहीं रहा।

कम हो गई औसत बारिश
पुराने गजेटियर में यह भी बताया गया है कि हिसार जिले में मानसून सीजन में 428 एमएम औसत बारिश होती थी, लेकिन अब यह घटकर 299.3 एमएम ही रह गई है। इस बार मानसून सीजन में 54 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इससे अंदाजा लगाया है कि हिसार क्षेत्र की जलवायु में कितना अंतर आया है।

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