अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री न्यायपालिका के कामकाज में सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर रहे हैं और उन्हें निवारक सजा दी जानी चाहिए जो माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की गरिमा के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा। उन्होंने इस संबंध में इसी तरह के मामले में दिए गए एक फैसले को बाबुल सुप्रियो बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य का हवाला दिया है।
इस मामले में 14 अक्टूबर 2020 में यह माना गया है कि लोगों के प्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने व्यवहार में विनम्र, अपने शिष्टाचार में गरिमापूर्ण और उनके द्वारा बोले गए शब्दों पर सतर्क रहें। उन्होंने मांग की कि इस मामले में भी अवमाननाकर्ताओं के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही शुरू की जाए और न्याय के हित में कड़ी सजा दी जाए और अवमाननाकर्ता को एक सबक दिया जाए जो दूसरों के लिए इस तरह के तिरस्कारपूर्ण शब्द न बोलने के लिए एक उदाहरण साबित हो।